नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा को लेकर लागू 1 लाख डॉलर की भुगतान शर्त को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। 18 सितंबर 2026 को जारी राष्ट्रपति की नई घोषणा के मुताबिक, यह शर्त अब 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेगी।
हालांकि, यह नियम हर H-1B धारक या हर तरह के आवेदन पर लागू नहीं होगा। इसका मुख्य असर अमेरिका के बाहर मौजूद उन नए H-1B कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी याचिका इस अतिरिक्त भुगतान के बिना आगे नहीं बढ़ सकती। अमेरिकी सरकार राष्ट्रीय हित में कुछ मामलों में इस शर्त से छूट भी दे सकती है।
IT कंपनियों पर गलत इस्तेमाल का आरोप
व्हाइट हाउस का कहना है कि कुछ नियोक्ताओं, IT स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने H-1B कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल किया है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, कुछ मामलों में कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों की जगह भरने की कोशिश की गई।
नई घोषणा में अमेरिकी प्रशासन ने दावा किया है कि सितंबर 2025 में 1 लाख डॉलर की भुगतान शर्त लागू होने के बाद बड़ी IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B रजिस्ट्रेशन में करीब 92 फीसदी की कमी आई है। यह आंकड़ा अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी किया गया है।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या असर?
भारत लंबे समय से H-1B वीजा पाने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा है। ऐसे में अमेरिका के बाहर से नए कर्मचारियों को भेजने वाली भारतीय IT कंपनियों और प्रोफेशनल्स के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है।
1 लाख डॉलर का अतिरिक्त भुगतान कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है। हालांकि, इसका असर हर भारतीय H-1B आवेदक पर एक जैसा नहीं होगा। मौजूदा H-1B धारकों और अमेरिका में पहले से रह रहे लोगों की स्थिति इस नई प्रवेश-प्रतिबंध व्यवस्था से अलग है।
इसलिए किसी व्यक्ति पर इसका वास्तविक असर उसके H-1B केस, अमेरिका में उसकी मौजूदा स्थिति और उस पर लागू किसी अपवाद पर निर्भर करेगा।
H-1B आवेदनों की जांच भी होगी सख्त
नई व्यवस्था के साथ ट्रंप प्रशासन ने H-1B आवेदनों की समीक्षा भी कड़ी करने के निर्देश दिए हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, संबंधित विभाग अतिरिक्त जानकारी और डेटा के आधार पर यह भी देखेंगे कि किसी कंपनी ने हाल में समान पदों पर काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाया है या ऐसी छंटनी की योजना बनाई है।
इसके अलावा विदेश विभाग, श्रम विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के बीच H-1B कार्यक्रम की निगरानी और आपसी समन्वय बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया है।
आगे बदल सकती है नीति
18 सितंबर 2026 की घोषणा के जरिए मौजूदा 1 लाख डॉलर की भुगतान शर्त को अगले 12 महीनों के लिए जारी रखा गया है। साथ ही, प्रशासन H-1B कार्यक्रम में वेतन, भर्ती प्रक्रिया और अमेरिकी कर्मचारियों पर पड़ने वाले संभावित असर की समीक्षा भी बढ़ा रहा है।





