रायपुर। संसद के मानसून सत्र के दौरान रायपुर लोकसभा क्षेत्र के वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने देश, खासकर छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूरों, जनजातीय परिवारों और गरीब हितग्राहियों के राशन अधिकारों का मुद्दा लोकसभा में उठाया।
उन्होंने सरकार का ध्यान इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (e-POS) मशीनों में बायोमेट्रिक फेल होने, सर्वर डाउन रहने और आईआरआईएस (IRIS) स्कैनर व ऑफलाइन स्मार्ट-टोकन जैसे दूसरे विकल्पों की जरूरत की ओर दिलाया। साथ ही छत्तीसगढ़ के दूर-दराज के जनजातीय इलाकों में राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी के दौरान लोगों को होने वाली परेशानियों पर भी जवाब मांगा।
केंद्र सरकार ने क्या कहा
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने बताया कि सरकार ने फिंगरप्रिंट के अलावा मल्टी-फिंगर, आईआरआईएस (आंखों की पुतली) और आधार ओटीपी जैसे कई वैकल्पिक तरीके उपलब्ध कराए हैं।
अगर परिवार के किसी एक सदस्य का बायोमेट्रिक मैच नहीं होता, तो उसी राशन कार्ड से जुड़ा कोई दूसरा पात्र सदस्य प्रमाणीकरण करके राशन ले सकता है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों में ‘नॉमिनी’ (नामित व्यक्ति) के जरिए भी राशन लेने की सुविधा दी गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि इंटरनेट की दिक्कत को देखते हुए e-POS मशीनों को ऑफलाइन मोड में भी चलने लायक बनाया गया है, ताकि नेटवर्क नहीं होने पर भी राशन वितरण प्रभावित न हो।
केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ समेत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को साफ निर्देश दिए हैं कि नेटवर्क की समस्या या बायोमेट्रिक फेल होने की वजह से किसी भी पात्र गरीब या जनजातीय हितग्राही को उसके हिस्से का राशन देने से इनकार नहीं किया जाएगा।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ इलाकों में जनजातीय भाई-बहनों और रोजगार के लिए बाहर जाने वाले प्रवासी मजदूरों को कई बार बायोमेट्रिक मैच नहीं होने या सर्वर डाउन रहने के कारण राशन लेने में परेशानी होती थी। लोगों की इसी समस्या को देखते हुए मैंने यह मुद्दा संसद में उठाया।
केंद्र सरकार का यह जवाब राहत देने वाला है कि सिर्फ तकनीकी कारणों से किसी का राशन नहीं रोका जा सकता। अब हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर पूरी तरह पालन हो, ताकि छत्तीसगढ़ के हर पात्र गरीब और श्रमिक को बिना परेशानी उसका पूरा राशन मिल सके।”





