छत्तीसगढ़ को इकोटूरिज्म (पारिस्थितिकी पर्यटन) के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए राज्य वन विभाग ने एक बड़ी पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विभाग ने राजधानी में विश्वस्तरीय बॉटनिकल गार्डन बनाने और पुराने नंदन-वन को नए रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है। खास बात यह है कि वन विभाग अपने प्रशासनिक नियंत्रण वाली गैर-वन भूमि पर इकोटूरिज्म और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं के लिए राज्य की पीपीपी (PPP) नीति के तहत निजी निवेशकों को आमंत्रित कर रहा है।
इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए 6 जुलाई को अरण्य भवन में देश के प्रमुख निवेशकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस परियोजना के तहत दो प्रमुख जगहों का तेजी से विकास किया जाएगा। पहली जगह नवा रायपुर का 350 एकड़ में फैला बॉटनिकल गार्डन है, जो जंगल सफारी के पास स्थित है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा। दूसरी जगह रायपुर-भिलाई रोड पर स्थित 43 एकड़ का नंदन-वन है, जिसे आधुनिक सुविधाओं के साथ नए रूप में तैयार किया जाएगा।
बैठक में शामिल निवेशकों ने वन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि देश में पहली बार कोई सरकारी विभाग पीपीपी मॉडल के जरिए पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ पर्यटन को साथ लेकर इतनी बड़ी योजना पर काम कर रहा है। निवेशकों ने भरोसा जताया कि यह परियोजना पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगी। उन्होंने कई उपयोगी सुझाव भी दिए, जिन पर विभाग के अधिकारियों ने गंभीरता से विचार करने और अंतिम डिजाइन में शामिल करने का आश्वासन दिया।

इस परियोजना की रूपरेखा दुनिया के मशहूर पार्कों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इसमें सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन, इंडोनेशिया के बोगोर बॉटनिकल गार्डन और मैसूर के वृंदावन गार्डन जैसी विशेषताओं को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। नवा रायपुर बॉटनिकल गार्डन में इको-फ्रेंडली लग्जरी होटल और रिसॉर्ट, मिलिट्री हेरिटेज म्यूजियम, म्यूजिकल फाउंटेन शो और वॉटर वर्ल्ड राइड्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इसके अलावा स्थानीय कारीगरों के लिए बाजार, बस्तर कला आउटलेट और ऑर्गेनिक किसानों के लिए विशेष बाजार भी प्रस्तावित हैं, ताकि स्थानीय संस्कृति और रोजगार को बढ़ावा मिल सके।
वहीं नंदन-वन के पुनर्विकास में स्वास्थ्य, वेलनेस और पारिवारिक मनोरंजन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यहां विदेशी पक्षियों के लिए आधुनिक एवियरी, आयुर्वेद वेलनेस स्टोर, ओपन-एयर इवेंट स्पेस और बच्चों के लिए स्पोर्ट्स व प्ले जोन जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

इस बैठक में हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, लैंडस्केपिंग और सस्टेनेबिलिटी सेक्टर से जुड़े 21 संभावित निवेशक समूहों ने हिस्सा लिया। इनमें प्रमुख रूप से अश्वनी चटले (भूटानी ग्रुप), उदयराज सिंघानिया (एसबीपीएल), सुबोध सिंघानिया, श्रीवत्स शर्मा (ग्रीन एड लैंडस्केपर प्रा. लि.), गगनदीप टुटेजा (होटल ग्रैंड इम्पेरिया), नीलेश मड़के (मेफेयर होटल्स एंड रिसॉर्ट्स), रितेश अग्रवाल (एस.एल.टी. इंफ्रास्ट्रक्चर), आदित्य गोलेछा (गोलेछा एग्रो प्रोजेक्ट्स प्रा. लि.), संजय जी. नागुलवार और अंशुमन बोड्डुन (फॉरेस्ट एन फ्लोरा मितावाकी), विवेक अग्रवाल (गीता लेक्स), अवधेश शुक्ला (होटल बेबीलोन), संधय पाल (अविनाश डेवलपर्स प्रा. लि.), दुलाराम विधानी (होटल आनंदा इम्पीरियल), आकाश पाठक (इलिका ग्रीनटेक प्रा. लि.), निकेश बरेलिया (एटी), चिंतानंद डी. (श्रीबालाजी), व्यास द्विवेदी (शालीमार कॉर्प लिमिटेड), विनाश अग्रवाल (सरभाल ग्रुप), शुभम गोयल (मायरा) और मनोज गोयल शामिल रहे।

उद्योग जगत के इन प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से साफ है कि पीपीपी मॉडल के जरिए विश्वस्तरीय इकोटूरिज्म परियोजनाओं को विकसित करने के छत्तीसगढ़ सरकार के विजन पर निवेशकों का भरोसा मजबूत है। करीब 44 प्रतिशत वनावरण वाले छत्तीसगढ़ का लक्ष्य अपनी प्राकृतिक संपदा का बेहतर उपयोग करते हुए पर्यावरण को सुरक्षित रखना, रोजगार बढ़ाना और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। वन विभाग की यह पहल राज्य के पर्यावरण और विकास दोनों के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है।





