कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजों ने भाजपा के भीतर बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। चुनाव में हुई अप्रत्याशित क्रॉस-वोटिंग के बाद पार्टी आलाकमान पूरी तरह सक्रिय हो गया है और इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए जवाब-तलब शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और राज्य प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल को 23 जून को दिल्ली तलब किया है। बैठक में क्रॉस-वोटिंग के पीछे की वजह, जिम्मेदार विधायकों की पहचान और उनके खिलाफ संभावित कार्रवाई पर चर्चा होगी।
गुरुवार को हुए चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात में से पांच सीटों पर कब्जा जमा लिया। कांग्रेस उम्मीदवार थिप्पन्नप्पा कमकनूर, पी.वी. मोहन, बी.के. हरिप्रसाद, बी.एस. शिवन्ना और विनय कार्तिक प्रकाश विजयी रहे। भाजपा के लिंगराज पाटिल और रघु आर जीत दर्ज करने में सफल रहे, जबकि सहयोगी जेडी(एस) के उम्मीदवार गोविंदराजू को हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव परिणामों ने भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन के भीतर छिपे असंतोष को भी उजागर कर दिया है। कांग्रेस को 151 वोट मिलने से यह संकेत मिला कि विपक्षी खेमे के कई विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर मतदान किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भाजपा के तीन और जेडी(एस) के आठ विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग किए जाने की आशंका है, जबकि भाजपा के एक विधायक का वोट अमान्य घोषित हुआ।
नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने साफ कहा कि पार्टी से विश्वासघात करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा कि पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है और तथ्यों के सामने आने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
कर्नाटक की इस क्रॉस-वोटिंग ने न सिर्फ भाजपा की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विपक्षी गठबंधन की मजबूती और भाजपा नेतृत्व की पकड़ को लेकर भी नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।






