तंत्र-मंत्र के नाम पर दो बेटों की बलि! मां, दो बहनों और भाई को उम्रकैद

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर अपने ही दो बेटों की हत्या करने के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने मां, दो बहनों और एक भाई को दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

यह सनसनीखेज मामला बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह का है। जांच में सामने आया था कि परिवार के सदस्य तंत्र साधना और अंधविश्वास में पूरी तरह डूब चुके थे। दोनों मृतक भाइयों ने इसका विरोध किया तो उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।

सात दिनों तक घर में चलता रहा पूजा-पाठ

पुलिस के अनुसार, फिरीतबाई सिदार अपने पांच बच्चों के साथ घर के एक कमरे में लगातार सात दिनों तक बंद रही। इस दौरान घर के भीतर पूजा-पाठ, तंत्र साधना और धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे थे। कमरे से अक्सर चिल्लाने और मंत्रोच्चार की आवाजें सुनाई देती थीं।

कई दिनों तक परिवार का कोई सदस्य बाहर नहीं निकला तो पड़ोसियों को शक हुआ। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो घर के अंदर तंत्र साधना का माहौल था और उज्जैन के एक बाबा की तस्वीर रखकर पूजा की जा रही थी।

अचेत हालत में मिले दोनों भाई

घर के अंदर अमरिका सिदार गुरु मंत्र का जाप कर रही थी, जबकि फिरीतबाई, चंद्रिका और विशाल धार्मिक अनुष्ठानों में व्यस्त थे। इसी दौरान विकास सिदार (25) और विक्की सिदार (22) जमीन पर अचेत पड़े मिले। दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

‘जय गुरुदेव’ के नारे लगा रहे थे आरोपी

17 अक्टूबर 2024 को जब पुलिस घर पहुंची, तब परिवार के सदस्य ‘जय गुरुदेव’ के नारे लगा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, परिवार के कुछ लोग दावा कर रहे थे कि दोनों युवक सत्संग में गए हैं और विशेष साधना के जरिए उन्हें दोबारा जीवित किया जा सकता है। इसी बात ने पुलिस का शक और गहरा कर दिया।

अंधविश्वास का विरोध करना पड़ा भारी

जांच में पता चला कि बड़ी बहन अमरिका करीब छह साल पहले उज्जैन के उमाकांत नामक बाबा से गुरु दीक्षा लेकर आई थी। इसके बाद परिवार में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। विकास और विक्की इस सबका विरोध करते थे और परिवार को इससे दूर रहने की सलाह देते थे।

पुलिस के अनुसार, इसी विरोध के चलते परिवार के अन्य सदस्यों ने दोनों भाइयों को खत्म करने की योजना बनाई। उन्हें विशेष पूजा और गुरु जाप में शामिल होने के बहाने बुलाया गया। आरोप है कि पहले पानी में कीटनाशक मिलाकर पिलाया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई। बाद में पूरे घटनाक्रम को धार्मिक अनुष्ठान का रूप देने की कोशिश की गई।

एफएसएल जांच में मिले अहम सबूत

घटना के बाद पुलिस, एफएसएल और मेडिकल टीम ने संयुक्त जांच की। मौके से पूजा सामग्री, हवन सामग्री, धार्मिक साहित्य, नोटबुक, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक और अन्य सामान बरामद किए गए। साथ ही परिजनों, ग्रामीणों और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने मां फिरीतबाई सिदार, बहनें अमरिका और चंद्रिका सिदार तथा भाई विशाल सिदार के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया।

परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, एफएसएल रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले सबूत और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोहरे हत्याकांड का दोषी करार दिया।

करीब डेढ़ साल चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने चारों आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने पैरवी की।

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