बालोद। भीषण गर्मी और प्यास की शिद्दत केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों को भी आबादी वाले इलाकों की ओर खींच रही है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के जगतरा गांव में आज सुबह उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब एक तेंदुआ पानी की तलाश में गांव के एक गहरे कुएं में गिर गया।
पाइप के सहारे टिकी सांसें
घटना की जानकारी तब हुई जब सुबह ग्रामीण कुएं से पानी निकालने पहुंचे। कुएं के भीतर का नजारा देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। एक विशाल तेंदुआ अपनी जान बचाने के लिए कुएं में लगी पानी की मोटर पाइप को कसकर पकड़े हुए था। गहरे पानी में डूबने से बचने के लिए वह घंटों इसी तरह संघर्ष करता रहा।
गांव में दहशत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
तेंदुए की मौजूदगी की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई, जिससे पूरे जगतरा गांव में दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम तेंदुए को कुएं से बाहर निकालने के लिए जेसीबी मशीन और खाट की मदद ले रही थी। तेंदुआ कई घंटों से कुएं में फंसा हुआ था। जैसे ही खाट के सहारे उसे बाहर ऊपर लाया गया, उसने अचानक छलांग लगाई और तेजी से गांव की ओर भाग गया।
घटना के बाद वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए को बिना ट्रेंकुलाइज किए बाहर निकालना बड़ी चूक थी। यदि पहले उसे बेहोश किया गया होता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। तेंदुए के अचानक गांव में प्रवेश करने से महिलाएं और बच्चे काफी भयभीत हैं।
तेंदुए के भागने के बाद वन विभाग की टीम भी उसके पीछे गांव की दिशा में रवाना हो गई। फिलहाल टीम आसपास के जंगलों और खेतों में तेंदुए की तलाश में जुटी हुई है। ग्रामीणों का मानना है कि तेंदुआ गांव से निकलकर पास के जंगल की ओर चला गया होगा। एहतियात के तौर पर लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।
एक बड़ा सबक: पानी का मोल पहचानें
यह घटना केवल एक वन्यजीव के रेस्क्यू की नहीं है, बल्कि बढ़ते जल संकट की ओर एक गंभीर इशारा है।
“प्यास सबको लगती है और गला सबका सूखता है।” आज जंगल के जलस्रोत सूख रहे हैं, जिसके कारण वन्यजीव बस्तियों का रुख कर रहे हैं। एक-दूसरे पर दोषारोपण करने के बजाय यह समय पानी के महत्व को समझने और जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाने का है। यदि हम आज प्राकृतिक संसाधनों का मोल नहीं पहचानेंगे, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी भयावह रूप ले सकती है



