रायपुर/बीजापुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार खुद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने अपने ही सरकार के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के विभाग की कार्यप्रणाली पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, बीते सप्ताह बीजापुर जिले के प्रवास के दौरान आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने मद्देड़ स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम स्कूल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आने पर उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए और कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
हालांकि कुछ मुद्दे इतने गंभीर पाए गए कि आयोग ने केवल निर्देश देने के बजाय कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया। आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम की धारा 13 और सहपठित धारा 15 के तहत मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज करने का फैसला किया है।
आयोग का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि कहीं भी लापरवाही सामने आती है तो आयोग सख्ती से कार्रवाई करेगा।
गौरतलब है कि स्वामी आत्मानंद स्कूल राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल हैं, जिन्हें शिक्षा विभाग के तहत संचालित किया जा रहा है। ऐसे में बीजापुर के इस स्कूल में सामने आई कमियां सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रही हैं।
अब देखना होगा कि आयोग के संज्ञान के बाद शिक्षा विभाग इन खामियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए क्या सुधार किए जाते हैं।



