नई दिल्ली। भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति बिल्कुल स्पष्ट है—किसी भी हालत में आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बुधवार को कही।
वे ‘भारत के पड़ोस में बदलती रणनीतिक परिस्थितियां’ विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम Headquarters Integrated Defence Staff की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था।
ऑपरेशन सिंदूर का किया उल्लेख
अपने संबोधन में सेठ ने पिछले साल हुए सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण है।
उन्होंने बताया कि 1947 के बाद हुए कई सैन्य अभियानों से अलग, ऑपरेशन सिंदूर को बड़े पैमाने पर स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म की मदद से अंजाम दिया गया। यह देश की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
रक्षा निर्यात और उत्पादन में तेज वृद्धि
रक्षा क्षेत्र में आए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए सेठ ने कहा कि भारत का रक्षा निर्यात 2014 में सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, जो 2025 तक बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये पहुंच गया है। सरकार ने इसे 2026 तक 29,000 करोड़ और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने बताया कि रक्षा बजट अब बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। साथ ही रक्षा उत्पादन विभाग ने 5,012 रक्षा उपकरणों में से 3,190 घटकों का स्वदेशीकरण कर लिया है।
एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्र में तेजी
सेठ ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में छोटे और मध्यम उद्योगों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। 2014 में जहां करीब एक करोड़ एमएसएमई इकाइयां थीं, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर लगभग 6.5 करोड़ हो गई है। इनसे करीब 25 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है।
इसके अलावा देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तेजी से विकसित हुआ है। 2014 में लगभग 1,000 स्टार्टअप थे, जो अब बढ़कर 29 लाख से अधिक हो गए हैं। इसी के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।
पड़ोसी देशों के साथ मजबूत रिश्ते
पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर बोलते हुए सेठ ने कहा कि बांग्लादेश भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। वहीं नेपाल के साथ भारत के संबंध इतिहास, संस्कृति और साझा सुरक्षा हितों पर आधारित हैं।
उन्होंने बताया कि भारत नेपाल में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। इनमें जनकपुर–कुर्था रेल लिंक, जलविद्युत परियोजनाएं, ट्रॉमा सेंटर और मोतीहारी पाइपलाइन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
रक्षा क्षेत्र में AI तकनीक पर जोर
कार्यक्रम के दौरान सैन्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर एक अहम नीति दस्तावेज भी जारी किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ही सेना की निर्णय क्षमता और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है।
इस मौके पर Defence Research and Development Organisation के अंतर्गत विकसित SAMADH (Situational Awareness for Aerial Drones) प्लेटफॉर्म का भी औपचारिक लॉन्च किया गया। इसे Centre for Artificial Intelligence and Robotics ने तैयार किया है, जो युद्ध के दौरान ड्रोन और स्वायत्त सिस्टम के जरिए रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराएगा।
इसके साथ ही इंटीग्रेटेड ऑनलाइन ट्रेनिंग एंड इवैल्यूएशन प्रोग्राम (IOTEP) की भी शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य भारतीय सेना के मध्यम स्तर के अधिकारियों में संयुक्त सैन्य संचालन की बेहतर समझ विकसित करना है।



