रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल — डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय — में पिछले आठ महीनों से हृदय से जुड़े बड़े ऑपरेशन बंद पड़े हैं।
जरूरी मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामग्री की कमी के कारण बाईपास और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाएं ठप हो चुकी हैं। इससे गंभीर हृदय रोगियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन बंद होने के बाद मरीजों के पास सीमित विकल्प बचते हैं। वे या तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर में लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करें या फिर निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च कर इलाज करवाएं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
जानकारी के अनुसार, सर्जरी में उपयोग होने वाले जरूरी उपकरणों की आपूर्ति करने वाले वेंडर और अस्पताल प्रबंधन के बीच भुगतान को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद सामग्री की सप्लाई बाधित हो गई।
हैरानी की बात यह है कि इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे बाईपास और ओपन हार्ट जैसे जटिल ऑपरेशन पूरी तरह रुक गए।
कभी दुर्लभ हृदय रोगों के सफल ऑपरेशन के लिए पहचान रखने वाला यह कार्डियक सर्जरी विभाग अब केवल सीमित प्रक्रियाओं तक सिमट गया है।
कार्डियक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, ऑपरेशन से जुड़े आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति के लिए टेंडर प्रक्रिया 27 फरवरी को पूरी होगी।
उन्होंने बताया कि होली के बाद बाईपास और ओपन हार्ट सर्जरी फिर से शुरू होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि उपकरणों की खरीदी के लिए तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, तनाव और असंतुलित खानपान के कारण हृदय रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले इस विभाग में सप्ताह में दो से तीन ओपन हार्ट सर्जरी नियमित रूप से की जाती थीं।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि साल में कम से कम एक बार हृदय की जांच अवश्य करानी चाहिए और नियमित व्यायाम तथा संतुलित आहार को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है — जब सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक ऑपरेशन ही बंद हो जाएं, तो आम नागरिक कहां जाए?



