भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में सोलर पंप योजना एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गई है। वर्ष 2026-27 के बजट भाषण में सरकार ने 3 हजार करोड़ रुपये खर्च कर एक लाख किसानों को सोलर पंप देने की घोषणा की है। लेकिन इस ऐलान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधायक कमलनाथ ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कमलनाथ का कहना है कि 2019-20 से आवेदन कर चुके हजारों किसान आज भी इंतजार कर रहे हैं। कई किसानों ने अपनी हिस्सेदारी की राशि जमा की, दस्तावेज पूरे किए, दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें अब तक सोलर पंप नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पिछले छह साल का हिसाब साफ नहीं है, तो अगले साल एक लाख पंप देने का दावा कितना व्यावहारिक है?
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र से सब्सिडी में कटौती होते ही योजना की रफ्तार थम गई। पहले 90 प्रतिशत तक सब्सिडी का भरोसा दिया गया था, जिसे बाद में घटाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया। सब्सिडी कम होते ही आवेदनों में गिरावट आई और योजना लगभग ठप पड़ गई। कई जिलों में तो विभागीय कामकाज भी प्रभावित हुआ।
कमलनाथ ने पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिला कार्यालयों के लॉगिन आईडी तक बंद कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय अधिकारियों के पास लंबित आवेदनों का पूरा डेटा तक उपलब्ध नहीं है। सारी जानकारी भोपाल स्तर से नियंत्रित हो रही है। उन्होंने इसे पारदर्शिता की बजाय “नियंत्रण की राजनीति” बताया।
उन्होंने कहा कि किसान कोई आंकड़ा नहीं है जिसे बजट भाषण में गिना दिया जाए। वह मेहनत करने वाला इंसान है, जो अपने खेत को सिंचित करने के लिए सरकारी योजनाओं पर भरोसा करता है। जब वादे पूरे नहीं होते, तो सिर्फ योजना नहीं, बल्कि भरोसा भी टूटता है।
कमलनाथ ने सरकार से मांग की है कि पहले लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाए और उसके बाद नई घोषणाएं की जाएं। वरना यह बजट दावा भी पूर्व घोषणाओं की तरह केवल कागज़ी साबित होगा।



