यूनियन बजट 2026: रक्षा पर रिकॉर्ड खर्च, 7.85 लाख करोड़ से मजबूत हुई भारत की सुरक्षा ढाल

Madhya Bharat Desk
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एक फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट में केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र को अब तक का सबसे बड़ा आवंटन दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए डिफेंस सेक्टर को 7.85 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं, जो पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह भारत के इतिहास का अब तक का हाईएस्ट एवर डिफेंस बजट है।

अगर दीर्घकालिक रुझानों पर नज़र डालें तो वर्ष 2014 के बाद से रक्षा बजट में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2014 में जहां रक्षा बजट 2.74 लाख करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। हर साल औसतन 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

डिफेंस बजट का सबसे अहम हिस्सा कैपिटल एक्सपेंडिचर माना जाता है, जिसका उपयोग नई तकनीक, आधुनिक हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म्स की खरीद में किया जाता है। यही हिस्सा सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की रीढ़ होता है। वित्त वर्ष 2015-16 में जहां कैपिटल एक्सपेंडिचर 83,614 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 2.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह साफ दर्शाता है कि सरकार भारतीय सेनाओं को फ्यूचर रेडी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

वर्तमान अस्थिर वैश्विक भू-राजनीतिक हालात—चाहे चीन हो या पाकिस्तान—के बीच बढ़ा हुआ रक्षा बजट भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस को मजबूत करता है। रक्षा क्षेत्र में बढ़ा निवेश केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव भी पड़ता है। डिफेंस स्पेंडिंग से घरेलू रक्षा उद्योग, स्टार्टअप्स और MSMEs को बढ़ावा मिलता है, रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और आयात पर निर्भरता घटती है। इससे भारत को एक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलती है।

बजट में सीमा सुरक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरकार ने 5,266 करोड़ रुपये बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित किए हैं। इस राशि से रणनीतिक सड़कों, सुरंगों, पुलों और एयरफील्ड्स का निर्माण होगा, जिससे सीमावर्ती इलाकों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी।

इसका असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। दशकों तक बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते कई परियोजनाएं अटकी रहीं और चीन इस रेस में आगे निकल गया। लेकिन 2014 के बाद से तस्वीर बदली है। अटल टनल से लेकर वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम तक, सीमा क्षेत्रों को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना गया है।

डिफेंस और बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ा हुआ आवंटन यह साफ संदेश देता है कि सरकार भारत की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। शांति की सबसे मजबूत नींव सशक्त रक्षा क्षमता होती है—और इस सच्चाई को मोदी सरकार की नीतियों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

इसी संदर्भ में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की पंक्तियां स्वतः याद आती हैं—

“क्षमा शोभती उस भुजंग को, जिसके पास गरल हो,

उसको क्या जो दंतहीन, विषहीन, विनीत सरल हो।”

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