सरगुजा/अंबिकापुर।जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सरगुजा आज एकजुट दिखाई दिया। खनन परियोजनाओं और संभावित विस्थापन के विरोध में हजारों ग्रामीणों के साथ-साथ अंबिकापुर शहर के नागरिक भी सड़कों पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, नारों में आक्रोश और आंखों में अपने अधिकारों की चिंता साफ झलक रही थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खनन के नाम पर उनकी आजीविका, पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को खतरे में डाला जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना जनसहमति और पारदर्शिता के फैसले थोपे जा रहे हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की कि किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले ग्राम सभाओं की सहमति ली जाए और पर्यावरणीय प्रभावों का ईमानदारी से आकलन किया जाए।
शहर से लेकर गांव तक फैली इस एकजुटता ने साफ संदेश दिया कि जनता अपने हक और संसाधनों की रक्षा के लिए अब चुप नहीं बैठेगी। प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा— “जनता ही सरकार है और जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”







