शीतकालीन चारधाम यात्रा को सुचारू बनाने की तैयारी तेज़: तीर्थ पुरोहितों ने सरकार को दिए 8 अहम सुझाव, मांगी मांस-मदिरा पर रोक और आरती का सीधा प्रसारण

Madhya Bharat Desk
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देहरादून। आगामी शीतकालीन चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। इसी कड़ी में चारधाम तीर्थ पुरोहित महासभा के सदस्यों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यात्रा संचालन को व्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए 8 महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। महासभा का कहना है कि यदि इन सुझावों पर अमल किया गया तो इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचेंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रीष्मकालीन चारधाम यात्रा का समापन 25 नवंबर को बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ होगा। इसके तुरंत बाद शीतकालीन चारधाम यात्रा की शुरुआत होगी। इस यात्रा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालु सालभर देवदर्शन का लाभ उठा सकें।

चारधाम तीर्थ पुरोहित महासभा ने पर्यटन सचिव को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कहा कि यात्रा को 12 महीने तक सुचारू रूप से चलाने के लिए कई व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की जरूरत है। महासभा ने पिछले वर्ष की तरह इस बार भी सरकार के प्रयासों की सराहना की, लेकिन साथ ही यात्रा को और व्यवस्थित बनाने पर बल दिया।

महासभा द्वारा दिए गए सुझावों में प्रमुख हैं— यात्रा मार्गों की मरम्मत और साफ-सफाई, जगह-जगह शौचालय, बिजली-पानी और संचार व्यवस्था को मजबूत करना। इसके अलावा शीतकालीन पूजा स्थलों पर स्थानीय लोगों की सहमति से धार्मिक समारोह आयोजित करने और आरती का सीधा प्रसारण सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।

तीर्थ पुरोहितों ने मांस और मदिरा की दुकानों को चारधाम मार्गों से हटाने का सुझाव दिया है ताकि यात्रा का पवित्र माहौल बना रहे। साथ ही, बर्फबारी के दौरान पर्याप्त मशीनों की व्यवस्था कर यातायात सुचारू रखने की भी अपील की गई है।

महासभा ने पड़ोसी तीर्थ स्थलों के व्यापक प्रचार-प्रसार और तुंगनाथ यात्रा में चंद्रशिला जाने पर प्रतिबंध लगाने जैसे नियमों का भी प्रस्ताव रखा है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने 2024 में 8 दिसंबर को शीतकालीन चारधाम यात्रा की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य चारधाम यात्रा को पूरे 12 महीने तक जारी रखना है ताकि श्रद्धालु सर्दियों में भी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के विग्रह स्वरूपों के दर्शन कर सकें। इन देव विग्रहों को कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन गद्दी स्थलों में विराजमान किया जाता है, जहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ती है।

सरकार और तीर्थ पुरोहित महासभा दोनों का मानना है कि यदि सहयोगात्मक रूप से योजनाओं को अमल में लाया गया, तो शीतकालीन चारधाम यात्रा धार्मिक पर्यटन को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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