बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल ने प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिन दावों के दम पर प्रशांत किशोर ने बिहार में सत्ता की चाबी अपने पास बताई थी, वही अब हवा होते दिख रहे हैं। 14 नवंबर को आने वाले परिणाम से पहले ही चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं उनका हश्र भी पुष्पम प्रिया चौधरी जैसा तो नहीं होगा।
बड़ी-बड़ी बातें, लेकिन नतीजे शून्य के करीब!
प्रशांत किशोर ने पिछले दो सालों में “जन सुराज यात्रा” के जरिए लोगों से सीधा संवाद कर राजनीति में बड़ा बदलाव लाने का दावा किया था। लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। ज्यादातर सर्वेक्षणों में जन सुराज पार्टी को 0 से 5 सीटों के बीच सीमित बताया गया है। केवल एक सर्वे ऐसा है जिसमें उन्हें अधिकतम 13 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
| एजेंसी | NDA | महागठबंधन | जन सुराज | अन्य |
|---|---|---|---|---|
| मैट्रीज आईएएनएस | 147-167 | 70-90 | – | 2-6 |
| पीपल्स पल्स | 133-159 | 75-101 | 0-5 | 2-8 |
| जेवीसी पोल | 135-150 | 88-103 | 0-13 | – |
| पीपल्स इनसाइट | 133-148 | 87-102 | 0-2 | 3-6 |
| चाणक्य स्ट्रैटजीज | 130-138 | 100-108 | – | 3-5 |
| पोलस्ट्रैट | 133-148 | 87-102 | 2-3 | 5 |
| पोल डायरी | 184-209 | 32-49 | – | 1-5 |
| प्रजा पोल एनालिटिक्स | 186 | 50 | 0 | 0-7 |
| टीआईएफ रिसर्च | 145-163 | 76-95 | – | 3-6 |
| पी-मार्क | 142-162 | 80-98 | 1-4 | 0-3 |
| डीवी रिसर्च | 137-152 | 83-98 | 2-4 | 1-8 |
जन सुराज की कमजोर होती पकड़
‘अमर उजाला’ और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जन सुराज पार्टी की चर्चा कुछ गिनी-चुनी सीटों तक सीमित रह गई है। कई जगहों पर पार्टी की मौजूदगी तो दिखी, पर जीत की संभावना नगण्य रही। जनता का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर खुद चुनाव लड़ते, तो पार्टी को बेहतर प्रदर्शन का मौका मिलता। उनका मैदान से बाहर रहना और बार-बार गायब रहना पार्टी के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ।
पुष्पम प्रिया की तरह दोहराएंगे इतिहास?
2020 में ‘द प्लुरल्स पार्टी’ से पुष्पम प्रिया चौधरी ने 102 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन सभी की जमानत जब्त हो गई थी। पुष्पम प्रिया खुद दो सीटों से चुनाव लड़ीं, पर असफल रहीं। इस बार प्रशांत किशोर के साथ कुछ ऐसा ही नजारा दिख सकता है।
अब निगाहें 14 नवंबर पर हैं, जब बिहार की जनता तय करेगी कि जन सुराज का “सपना” साकार होगा या इतिहास खुद को दोहराएगा।


