छत्तीसगढ़ सरकार चाहे भले ही “जीरो टॉलरेंस” की बात करे, लेकिन ज़मीनी स्तर पर हालात बिल्कुल विपरीत नज़र आ रहे हैं। भ्रष्टाचार के ऐसे ही एक चौंकाने वाले मामले ने फिर से व्यवस्था की पोल खोल दी है। यह मामला कोरबा ज़िले के ग्राम पंचायत लालपुर का है, जहाँ पंचायत सचिव मोहम्मद हसन और सरपंच धनेश्वर सिंह पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ से पंचायत की योजनाओं में गड़बड़ी कर लाखों रुपये का बंदरबांट किया। ग्रामीणों के अनुसार, इस भ्रष्टाचार में सरकारी स्कूल के शिक्षक रामशेखर पांडे को भी शामिल किया गया। बताया जा रहा है कि सचिव और सरपंच ने निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिल बनवाए और शिक्षक को ठेकेदार बताते हुए उसके खाते में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ग्रामवासियों ने जब इस पूरे खेल की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में की, तब कलेक्टर अजीत वसंत ने पोड़ी एसडीएम को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद 10 अक्टूबर को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई। लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी यह जांच अधूरी ही है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
एसडीएम मनोज कुमार ने इस मामले पर कहा कि पंचायत की राशि सरकारी स्कूल के शिक्षक के खाते में ट्रांसफर नहीं की जा सकती। यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर अनियमितता है, जिसकी जांच करवाई जाएगी।
छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद नेताओं ने राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का दावा तो किया था, लेकिन कोरबा के लालपुर जैसे मामले यह दर्शाते हैं कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार अब



