रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राजधानी रायपुर के राजीव भवन में हुई कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक में पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया। बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि चौबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
दरअसल, पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर बयान दिया था कि “छत्तीसगढ़ की जनता आज भी बघेल का नेतृत्व चाहती है।” इस बयान को कांग्रेस की अनुशासनहीनता मानते हुए एक पदाधिकारी ने कार्यसमिति में मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि ऐसे बयानों से संगठन की एकजुटता प्रभावित होती है, इसलिए पार्टी अनुशासन बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी है।
बैठक में मौजूद सभी 31 सदस्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया और हाथ उठाकर चौबे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। समिति का मानना है कि भविष्य में कोई और नेता ऐसा बयान न दे, इसके लिए उदाहरण पेश करना आवश्यक है।
इसी बैठक में कुलदीप जुनेजा का मुद्दा भी सामने आया। सदस्यों ने सवाल उठाया कि अभी तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जुनेजा पर आरोप है कि उन्होंने अजीत कुकरोजा को कांग्रेस से निष्कासन खत्म करने को लेकर प्रदेश नेतृत्व पर निशाना साधा था।
रविंद्र चौबे का भूपेश बघेल के पक्ष में दिया गया बयान कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान को उजागर करता है। पार्टी पहले ही गुटबाजी से जूझ रही है और ऐसे वक्त में चौबे जैसे वरिष्ठ नेता का बयान पार्टी लाइन से हटकर माना गया। नतीजतन, कांग्रेस अब अनुशासन बनाए रखने के लिए चौबे पर कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है।
इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक तरफ कांग्रेस में अनुशासन को लेकर सख्ती दिखाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ यह प्रकरण पार्टी के भीतर नेतृत्व संघर्ष की झलक भी दे रहा है। आने वाले समय में चौबे पर क्या कार्रवाई होती है और यह विवाद किस मोड़ पर पहुंचता है, यह देखना दिलचस्प होगा।



