भारतीय लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक तंत्र है, लेकिन समय के साथ इसमें अनेक चुनौतियां उत्पन्न हुई हैं। पूर्व हाईकोर्ट जज रोहित आर्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज लोकतंत्र धीरे-धीरे “चुनाव तंत्र” में बदलता जा रहा है। चुनावों की बार-बार की प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास दोनों पर असर डालती है। इस संदर्भ में उन्होंने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा को मजबूती से रखा।
मुख्य भाग:
भारत में हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। इससे राजनीतिक दल और सरकारें लगातार चुनावी मोड में रहती हैं। इसका असर नीतियों और विकास कार्यों पर पड़ता है। बार-बार के चुनावों में सरकारी खर्च भी बढ़ता है और जनता की अपेक्षाएं भी अधूरी रह जाती हैं।
पूर्व HC जज रोहित आर्य का मानना है कि यदि देशभर में एक साथ चुनाव कराए जाएं तो इससे लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सामने आएगी। इससे जनता को बार-बार चुनावी शोर से राहत मिलेगी, और सरकारें पूरे कार्यकाल में विकास और न्याय पर केंद्रित रह सकेंगी।
उनके अनुसार ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ न केवल स्वतंत्रता और न्याय को मजबूती देगा, बल्कि राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में भी बड़ा कदम होगा।






