मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित आदिवासी छात्रावास से बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ रहने वाले विद्यार्थियों को कड़वी रोटी और बेहद खराब गुणवत्ता वाला भोजन परोसा जा रहा है। स्थिति इतनी भयावह है कि छात्रों को दी जाने वाली सब्जी में मृत मेंढक तक पाया गया। भोजन की इस हालत ने न केवल छात्रों की सेहत को खतरे में डाल दिया है, बल्कि छात्रावास प्रबंधन की लापरवाही और उदासीनता को भी उजागर किया है।
खाना ही नहीं, छात्रावास में पानी की समस्या भी गंभीर है। तीन दिनों से विद्यार्थियों को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसी परिस्थिति में गरीब और आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले ये बच्चे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं। शिक्षा प्राप्त करने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए घर से दूर रहने वाले छात्रों को इस तरह की असुविधाएं झेलनी पड़ रही हैं, जो उनकी मानसिक और शारीरिक दोनों ही स्थितियों पर नकारात्मक असर डाल रही हैं।
यह घटना प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करती है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे छात्रावासों का उद्देश्य कमजोर वर्ग के बच्चों को सुरक्षित माहौल और गुणवत्तापूर्ण जीवन सुविधा देना है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत नज़र आ रही है।
जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी तुरंत संज्ञान लें और छात्रावासों की नियमित जांच हो। साथ ही, भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शिक्षा का अधिकार तभी सार्थक हो सकता है, जब बच्चों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण मिले।



