सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्यपालों को विधानसभा से पास बिल पर देरी करने का हक नहीं, सरकार संविधान से बंधी है

Madhya Bharat Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी राज्य की सरकार राज्यपाल की इच्छा या व्यक्तिगत मर्जी पर निर्भर नहीं हो सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल विधानसभा द्वारा पास किए गए बिलों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। यह संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ है।

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्यपाल का दायित्व केवल संवैधानिक प्रक्रिया तक सीमित है। वे विधानसभा से पारित बिलों को अपनी सुविधा अनुसार रोककर नहीं रख सकते। यदि ऐसा होता है तो यह सीधे तौर पर निर्वाचित सरकार की कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न करता है और जनता की इच्छा का अनादर करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्यपाल का पद किसी भी तरह से राजनीतिक हस्तक्षेप का माध्यम नहीं बन सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुनी गई सरकार ही नीतिगत फैसले लेती है और राज्यपाल को केवल संवैधानिक भूमिका निभानी चाहिए।

यह फैसला उस समय आया है जब कई राज्यों में राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव के मामले लगातार बढ़ रहे थे। अदालत के इस आदेश से अब यह स्पष्ट हो गया है कि जनता के जनादेश से बनी सरकार ही सर्वोच्च होगी और राज्यपाल उसकी राह में रुकावट नहीं डाल सकते।

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