छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में लागू शाला-शिक्षक युक्तियुक्तकरण नीति ने विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। इस नीति के अंतर्गत अतिरिक्त और रिक्त पदों का पुनर्गठन कर शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे अब राज्य के सुदूर अंचलों में भी विद्यार्थियों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है।
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र कोरकोमा स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में यह बदलाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। पहले यहां शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती थी और कई कक्षाएं खाली रह जाती थीं। लेकिन युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षकों रामेश्वरी रत्नाकर और पद्मा निषाद की नियुक्ति के बाद अब सभी कक्षाएं समय पर संचालित हो रही हैं। नियमित कक्षाओं के साथ सतत अध्ययन और अध्यापन कार्य भी सुव्यवस्थित रूप से चल रहा है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।







