मालेगांव ब्लास्ट केस: सभी आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा ‘आतंकवाद का कोई धर्म नहीं’, सियासत गर्माई

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने सभी सात आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। करीब 17 वर्षों की सुनवाई के बाद आया यह निर्णय अब सियासी हलकों में हलचल पैदा कर चुका है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी मजहब से जुड़ा नहीं होता, और किसी भी धर्म में हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

इस निर्णय के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि उन्हें पहले से इस फैसले का अंदेशा था। उन्होंने कहा, “अक्लमंद को इशारा काफी है… गृह मंत्री के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया था।”

रेणुका चौधरी ने यह भी कहा, “जब किसी मुसलमान को आतंकवादी कहा जाता है, तो ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल मजबूरी बन जाता है। मैं नहीं मानती कि किसी धर्म में सब निर्दोष होते हैं, हर मजहब में चरमपंथी हो सकते हैं।”

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “17 साल बाद सभी आरोपी बरी हो गए, लेकिन असली सवाल यह है कि ब्लास्ट किया किसने? RDX कहां से आया? क्या महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी?”

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने फैसले को “निर्णय” तो कहा, लेकिन उसे “न्याय” मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “धार्मिक आतंकवाद की थ्योरी गढ़ने वाले अफसर अब भाजपा में हैं, और यही असली विडंबना है।”

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस फैसले पर भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं खुद प्रज्ञा ठाकुर से मिलने नासिक जेल गई थी। जिस तरह की यातनाएं उन्हें दी गईं, वह किसी भी महिला के लिए असहनीय थीं। ‘भगवा आतंक’ जैसे शब्द गढ़ने वालों को जवाब देना चाहिए।”

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, “इस फैसले ने कांग्रेस की उस साजिश को उजागर कर दिया, जिसमें उन्होंने ‘हिंदू आतंकवाद’ का झूठ फैलाया था। यह फैसला सच्चाई की जीत है।”

इधर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सवाल उठाया कि, “अगर सभी आरोपी निर्दोष हैं तो फिर ब्लास्ट किया किसने? सच्चाई क्या है, यह सामने आना जरूरी है।”

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