बघेल परिवार की ‘जेल परंपरा’ और भूपेश का ‘श्राप’: छत्तीसगढ़ की सियासत में नया मोड़
रायपुर, 25 जुलाई 2025 — छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बघेल परिवार सुर्खियों में है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल खुद भूपेश बघेल की जेल यात्राओं के बाद अब उनके बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। वहीं, भूपेश बघेल के ‘श्राप’ वाले बयान ने पूरे घटनाक्रम को व्यंग्य और चर्चा का विषय बना दिया है।
बघेल परिवार की कथित ‘जेल परंपरा’ की शुरुआत 2001 में हुई, जब नंदकुमार बघेल ने “रावण को मत मारो” नामक विवादित किताब लिखी। तब कांग्रेस की अजीत जोगी सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगाया और नंदकुमार को जेल भेजा। दिलचस्प बात यह रही कि उस वक्त भूपेश खुद सरकार में मंत्री थे।
दूसरी बार 2021 में नंदकुमार तब चर्चा में आए जब उन्होंने ब्राह्मणों को ‘विदेशी’ कहकर उनके बहिष्कार की बात की। इसके बाद रायपुर में उन्हें गिरफ्तार कर 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया — इस बार भूपेश बघेल की ही सरकार थी। नंदकुमार ने तब जमानत लेने से भी इनकार कर दिया था।
18 जुलाई 2025 को भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ED ने शराब घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया। ED की टीम ने भिलाई स्थित आवास पर छापा मारकर चैतन्य को जन्मदिन पर हिरासत में लिया।
भूपेश बघेल ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया और आरोप लगाया कि यह सब अडानी समूह की अवैध वनों की कटाई का मुद्दा विधानसभा में उठाने का परिणाम है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व—खड़गे, सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी—से मिलकर केंद्र पर निशाना साधा।
हरेली तिहार पर 24 जुलाई को भूपेश ने जनसभा में कहा,
“जिन्होंने मेरे पिता को जेल भेजा, उनकी सरकार गई। जिन्होंने मुझे जेल भेजा, उनकी सरकार भी गई। अब मोदी जी ने मेरे बेटे को जेल भेजा है—डबल इंजन सरकार भी जाएगी।”
हालांकि इस बयान के तुरंत बाद सियासी हलकों में चुटकी ली गई कि 2021 में नंदकुमार को जेल तो खुद भूपेश की सरकार ने भेजा था, और 2023 में उनकी ही सरकार सत्ता से बाहर हो गई। सवाल उठ रहे हैं कि कहीं यह ‘श्राप’ खुद उनकी पार्टी पर तो नहीं लौट आया?
भूपेश समर्थकों ने इसे एक ‘अन्याय के खिलाफ संघर्ष’ बताया, तो विरोधियों और यंहा तक कांग्रेस के कुछ गुट भी तंज कसते हुए कहा रहे है कि यह भ्रष्टाचार के नए आयामों का परिणाम है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में बीजेपी और ईडी के खिलाफ प्रदर्शन किए, लेकिन जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है—“जब अपने पिता को जेल भेजा था, तब तो पुतले नहीं जलाए गए थे!”
नंदकुमार की विवादित किताब से लेकर चैतन्य की गिरफ्तारी तक और भूपेश के श्रापों से लेकर राजनीतिक बयानबाजी तक, यह पूरा घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की राजनीति को मनोरंजक बना रहा है। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि भूपेश का अगला ‘श्राप’ किसे लगेगा—या कहीं वो फिर से खुद पर न लौट आए!



