छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास स्थित खरोरा इलाके से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरोरा की एक मशरूम फार्म में 97 मजदूरों और उनके साथ मौजूद 40 बच्चों को जबरन बंधक बनाकर रखा गया था और बीते 6 महीनों से उनसे बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी।
मजदूरों की हालत बेहद दयनीय थी। न उन्हें समय पर खाना मिलता था, न इलाज, और विरोध करने पर उन्हें शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं। इस अमानवीय स्थिति की जानकारी मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग को एक लिखित शिकायत सौंपी गई। उसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने छापामार कार्रवाई करते हुए सभी मजदूरों को मुक्त करवाया और रायपुर लाया गया।
इस पूरी घटना में खास बात यह रही कि महिला मजदूरों, जिनमें गर्भवती महिलाएं भी थीं, को भी अमानवीय यातनाएं दी गईं। कुछ मामलों में यौन उत्पीड़न की शिकायतें भी सामने आई हैं।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर हो रहे इस अत्याचार को इतने समय तक छुपाकर कैसे रखा गया? क्या इसमें प्रशासनिक मिलीभगत थी?
स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इस मामले को दबाने की कोशिश भाजपा के एक बड़े नेता के द्वारा की जा रही है। वे मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे समाज में आज भी मौजूद उस अंधेरे कोने की याद दिलाती है जहां मजदूरों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं होती।
मुख्य बिंदु:
1. 97 मजदूर और उनके 40 बच्चे 6 महीने से थे बंधक
2. गर्भवती महिलाओं को भी दी गईं यातनाएं
3. महिलाओं के यौन उत्पीड़न के भी मामले
4. छापे में सभी मजदूरों को किया गया रेस्क्यू
5. मामले को दबाने और छुपाने की कोशिशें जारी



