छत्तीसगढ़ में अफसर-नेता-ठेकेदार गठजोड़ ने फिर कर दिखाया कमाल – बिना ट्रेनर के वोकेशनल कोर्स, स्कूलों को भेज दिए 40 करोड़ के उपकरण!
रायपुर | शिक्षा का स्तर सुधारने की बातें अब फाइलों और भाषणों तक सीमित रह गई हैं। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर बड़ा खेल हो गया है। सरकार ने 652 स्कूलों में वोकेशनल कोर्स के लिए करीब 40 करोड़ रुपये के उपकरण भेज दिए, लेकिन इनका इस्तेमाल कौन सिखाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है क्योंकि शिक्षक ही नहीं हैं!

ये वो “विकास” है जो सिर्फ सरकारी आंकड़ों में होता है। स्कूलों में शो-पीस की तरह रखे बॉक्स, जिन पर ‘ऑटोमोटिव ट्रेड’ और ‘ब्यूटी एंड वेलनेस’ जैसे टैग लगे हैं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं। यानी सरकार ने छात्रों के नाम पर खरीदी तो कर ली, लेकिन सिखाने की जहमत नहीं उठाई।
592 स्कूलों में पहले से वोकेशनल कोर्स चल रहे हैं, जिनमें भी यही हाल है – अधूरी ट्रेनिंग, अधूरे शिक्षक और अधूरा भविष्य। और इस बार 652 नए स्कूलों को जोड़ दिया गया। न ट्रेनर, न ट्रेनिंग – फिर भी बजट उड़ाया जा रहा है।
पिछले साल भी छात्र बिना परीक्षा दिए पास हुए क्योंकि पढ़ाने वाला ही कोई नहीं था। लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। करोड़ों की खरीदी जारी है और जवाबदेही गायब।
बात यहीं नहीं रुकती – कई स्कूलों में बॉक्स खोले भी नहीं गए, क्योंकि न तो शिक्षक हैं, न कोई जानकार जो उपकरणों को समझ सके।



