रायपुर। हास्य कविता के क्षेत्र में देश-विदेश में अपनी अनोखी पहचान बनाने वाले पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का अंतिम संस्कार रथयात्रा के शुभ दिन रायपुर में संपन्न हुआ। यह एक भावनात्मक संयोग रहा कि जिस दिन भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकली, उसी दिन हास्य काव्य के रथ के सारथी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
डॉ. दुबे का निधन साहित्यिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में साहित्यकार, कवि, राजनेता और उनके प्रशंसक पहुंचे। विशेष रूप से कवि डॉ. कुमार विश्वास उनके अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
डॉ. दुबे ने न केवल भारत में बल्कि अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, दुबई सहित 11 देशों में काव्य पाठ कर भारतीय हास्य कविता की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। वे अपनी विशिष्ट शैली, तीव्र व्यंग्य और सामाजिक संदेशों से भरपूर रचनाओं के लिए प्रसिद्ध थे।
उन पर एक अभिनंदन ग्रंथ तैयार किया जा रहा था, जो उनकी साहित्यिक यात्रा और योगदान का दस्तावेज़ बनने वाला था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
एक चिकित्सक से कवि बने डॉ. दुबे ने हास्य को गंभीरता से प्रस्तुत कर लोगों को न केवल हंसाया, बल्कि सोचने पर भी मजबूर किया। उनका जाना केवल एक कवि का जाना नहीं, बल्कि एक युग का अवसान है।
उनकी यादें, कविताएं और जीवन दर्शन साहित्यिक दुनिया में हमेशा जीवित रहेंगे।



