छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र ने वो कर दिखाया है, जो लाखों युवा सिर्फ सपनों में सोचते हैं। उन्होंने भारतीय नौसेना में लेफ्टिनेंट बनकर न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊँचा किया, बल्कि पूरे राज्य के युवाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गए।
देवेंद्र का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। पढ़ाई के दौरान उनके पास महंगे कोचिंग क्लासेस या अंग्रेजी स्पीकिंग इंस्टिट्यूट्स की सुविधा नहीं थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कमरे में आईना लगाकर, खुद को एक अफसर की तरह खड़ा करना और अंग्रेजी में बातचीत की प्रैक्टिस करना, यही उनका रूटीन बन गया। दिन-ब-दिन सुधार करते हुए उन्होंने आत्मविश्वास के साथ SSB इंटरव्यू और NDA की परीक्षा पास की।
जब देवेंद्र NDA (नेशनल डिफेंस एकेडमी) में पहुंचे, तो असली परीक्षा शुरू हुई। सुबह 4 बजे की परेड, दौड़, थकाने वाले फिजिकल ड्रिल्स और साथ में पढ़ाई — सब कुछ एक साथ। देवेंद्र कहते हैं, “NDA में शरीर से ज़्यादा मानसिक ताकत की ज़रूरत होती है। कई बार लगता था कि अब नहीं कर पाऊंगा, लेकिन हर सुबह खुद को यह याद दिलाता था कि क्यों शुरू किया था।”
इस कठिन ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने सिर्फ सैनिक अनुशासन नहीं सीखा, बल्कि नेतृत्व, टीमवर्क और जिम्मेदारी की भावना को भी अपनाया। लेफ्टिनेंट बनने के बाद आज जब वो यूनिफॉर्म पहनते हैं, तो उनकी आँखों में गर्व और आत्मविश्वास दोनों साफ झलकते हैं।
देवेंद्र के माता-पिता, जो साधारण परिवार से आते हैं, बेटे की इस सफलता पर भावुक हैं। उन्होंने बताया कि देवेंद्र शुरू से ही मेहनती और अनुशासित था। आज जब लोग उनका नाम इंडियन नेवी के अफसरों की सूची में देखते हैं, तो उन्हें अपने संघर्ष और त्याग की कीमत समझ में आती है।



