PRSU में संस्कृत को मिलेगी नई उड़ान: एक करोड़ की लागत से कोर्स, किताबें और डिजिटल संसाधनों का विस्तार

admin
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पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से संस्कृत शिक्षा को नया आयाम मिलने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि इस सत्र से संस्कृत को नियमित रूप से पढ़ाया जाएगा। साथ ही, चार अन्य विशेष कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं, जो विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक की समझ भी प्रदान करेंगे।

इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए विश्वविद्यालय ने एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। इस बजट से नई पाठ्यपुस्तकों की खरीद, अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन, स्मार्ट क्लास रूम्स, लाइब्रेरी संसाधनों का उन्नयन और फर्नीचर जैसे बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि नई पहल का उद्देश्य युवाओं में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि बढ़ाना है। इसके अलावा तकनीकी पाठ्यक्रमों को भी इस तरह से डिजाइन किया गया है कि छात्र संस्कृत और आधुनिक विषयों के बीच सेतु बना सकें।

PRSU के कुलपति ने बताया कि “संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, दर्शन और विज्ञान की मूल जड़ है। इसे आगे बढ़ाने के लिए हम हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।”

इस बदलाव से छात्रों को न केवल रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि भारतीय परंपरा से जुड़ने का भी सशक्त माध्यम प्राप्त होगा। विश्वविद्यालय की यह पहल शिक्षा और संस्कृति के समन्वय की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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