काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मुद्दा योग सर्टिफिकेट कोर्स में दिव्यांग अभ्यर्थियों की भागीदारी को लेकर है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी हालिया अधिसूचना में कहा गया है कि दिव्यांग उम्मीदवार इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के योग्य नहीं माने जाएंगे, जिससे अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी फैल गई है।
इस फैसले के विरोध में दिव्यांग पीठाधीश्वर स्वामी कृपानंद महाराज ने विश्वविद्यालय के मालवीय भवन के बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय समान अवसर अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने 24 घंटे पहले ही इस फैसले के खिलाफ ज्ञापन सौंपा था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिसूचना में कोई संशोधन नहीं किया।
क्या है पूरा मामला?
BHU के योग साधना केंद्र द्वारा जुलाई 2025 में शुरू होने वाले चातुर्मासिक अंशकालीन योग प्रमाणपत्र कोर्स के लिए आवेदन मांगे गए थे। लेकिन अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि “दिव्यांग अभ्यर्थी प्रवेश के पात्र नहीं होंगे।”
इसपर देशभर से आलोचना शुरू हो गई। केंद्रीय सलाहकार बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. उत्तम ओझा ने इस विषय पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार को पत्र लिखकर संज्ञान लेने की मांग की है।
प्रशासन की सफाई और स्वामी कृपानंद का विरोध
योग साधना केंद्र के समन्वयक प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और प्रशासन इस पर विचार कर रहा है। उधर, प्रोक्टोरियल बोर्ड की टीम अनशनरत स्वामी कृपानंद को मनाने पहुंची लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक अधिसूचना में संशोधन नहीं होगा, उनका अनशन जारी रहेगा।


