युवा नेतृत्व से डर या सियासत? 9 साल से चुनाव बंद, NSUI सड़कों पर

Madhya Bharat Desk
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पिछले नौ वर्षों से छत्तीसगढ़ में छात्र संघ चुनाव न होने के खिलाफ कांग्रेस की छात्र शाखा NSUI ने प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन तेज कर दिया है। सोमवार को प्रदेश के लगभग 250 महाविद्यालयों में एक साथ राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे गए, जिसमें चुनाव बहाली की मांग की गई।

राजधानी रायपुर के महंत कॉलेज में NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में ज्ञापन दिया गया। पांडेय ने कहा, “छात्र संघ चुनाव शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके जरिए छात्रों की समस्याएं प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती हैं और वे लोकतांत्रिक अधिकारों का अभ्यास कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि ये चुनाव छात्रों में नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी का विकास करते हैं तथा छात्र हितों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हैं। छात्रों का आरोप है कि वरिष्ठ नेता युवा नेतृत्व के उदय से डरते हैं, क्योंकि चुनावों से नई पीढ़ी की राजनीति को बल मिलता है। पिछले चुनावों में कई बड़े नेताओं के भाई-भतीजों को छात्र अध्यक्ष पद न मिलने के बाद से ही यह सिलसिला रुक गया है।

6 अप्रैल को विश्वविद्यालयों का घेराव

NSUI ने आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है। प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने बताया कि 6 अप्रैल को प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का एक साथ घेराव किया जाएगा। संगठन का दावा है कि छात्र राजनीति को दबाने की साजिश रचकर युवाओं को नेतृत्व से वंचित किया जा रहा है।

NSUI कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द चुनाव बहाल नहीं हुए, तो आंदोलन और उग्र रूप धारण कर लेगा। राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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