“सुशासन में सोलर की रोशनी या महाघोटाले का अंधेरा? डौंडीलोहारा में करोड़ों की ठगी”

Madhya Bharat Desk
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क्या यह सच में “सुशासन की रोशनी” है, या फिर सोलर प्रोजेक्ट के नाम पर चमकता हुआ एक बड़ा घोटाला? बालोद जिले के डौंडीलोहारा से सामने आया 1.33 करोड़ रुपये का ठगी का मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

रायपुर के अधिवक्ता विनीत तिवारी को सोलर लाइट पोल लगाने के नाम पर ऐसा सपना दिखाया गया, जिसमें मुनाफा भी था और सरकारी काम का भरोसा भी। तीन लोगों भावेश जैन, ऋतुप्रण वैष्णव और संतोष कर्ण ने मिलकर उन्हें इस प्रोजेक्ट में निवेश के लिए तैयार किया।

“सुशासन” की मुहर लगाने के लिए उन्हें जनपद पंचायत के तत्कालीन सीईओ पंकज देव से भी मिलवाया गया। बताया जाता है कि वहीं से ‘वर्क ऑर्डर’ का भरोसा मिला और यहीं से भरोसे की नींव रखी गई।

बस फिर क्या था 4 अप्रैल को 10 लाख, 5 अप्रैल को 55 लाख और 15 अप्रैल को 68.64 लाख रुपये… देखते ही देखते 1.33 करोड़ रुपये आरोपियों के पास पहुंच गए। अधिवक्ता ने तो 79 लाख से ज्यादा के सोलर पोल और लाइट खरीदकर काम भी शुरू करा दिया।

लेकिन 28 अप्रैल को अचानक सब कुछ ठप हो गया। वजह बताई गई “ऊपर से आदेश है।”

जब सच्चाई जानने के लिए सीईओ से संपर्क किया गया, तो उन्होंने किसी भी तरह के वर्क ऑर्डर से साफ इनकार कर दिया।

अब सवाल ये है कि अगर वर्क ऑर्डर था ही नहीं, तो भरोसा किस आधार पर दिलाया गया? अगर नहीं था, तो सीईओ के केबिन में क्या हुआ? और अगर सब कुछ फर्जी था, तो इतनी बड़ी रकम आखिर किस सिस्टम के भरोसे चली गई?

रकम वापस लेने की कोशिश में मिले चेक भी बाउंस हो गए यानि “रोशनी” की पूरी कहानी अब अंधेरे में नजर आ रही है।

इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प मोड़ यह है कि पीड़ित को एक तय फर्म से ही सामान खरीदने और एक खास ठेकेदार से काम कराने के लिए कहा गया। सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ ठगी है या फिर एक सुनियोजित नेटवर्क?

फिलहाल बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस “सोलर रोशनी” के पीछे का सच क्या है यह जांच के बाद ही सामने आएगा।

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