नई दिल्ली :देश में चुनावी नक्शे को बदलने वाली बड़ी प्रक्रिया परिसीमन को लेकर हलचल तेज होती नजर आ रही है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार के निर्देश पर आंतरिक स्तर पर परिसीमन से जुड़ी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, हालांकि इस पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया है।
सूत्र बताते हैं कि भारत का चुनाव निर्वाचन आयोग (ECI) और सरकारी तंत्र के बीच लगातार संवाद हो रहा है। साथ ही सत्तारूढ़ दल के संगठनात्मक स्तर पर भी इस विषय पर मंथन जारी है।
चुनावों के बाद तेज हो सकती है प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद केंद्र सरकार नए परिसीमन आयोग के गठन का फैसला ले सकती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में गठित आयोग की अध्यक्षता रंजना प्रकाश देसाई ने की थी, जिसने जम्मू-कश्मीर सहित कुछ क्षेत्रों में सीमाओं के पुनर्निर्धारण का काम किया था।
सीटों में बड़ा बदलाव संभव
सूत्रों के अनुसार, इस बार परिसीमन प्रक्रिया काफी तेज गति से आगे बढ़ सकती है। जनसुनवाई और प्रशासनिक स्तर पर चर्चाओं के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा।
संभावना जताई जा रही है कि:
- कई राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ सकती है
- लोकसभा सीटों का भी पुनर्गठन होगा
- देशभर में लोकसभा की कुल सीटें 700 के पार जा सकती हैं
छत्तीसगढ़ में क्या बदल सकता है?
छत्तीसगढ़ भी इस प्रक्रिया से अछूता नहीं रहेगा। अनुमान है कि:
- वर्तमान 90 विधानसभा सीटें बढ़कर 120-130 तक हो सकती हैं
- 11 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 14 या 15 तक पहुंच सकती है
नए परिसीमन पर चुनाव कब?
सूत्रों की मानें तो:
- 2027-28 के विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर हो सकते हैं
- 2029 के लोकसभा चुनाव भी नई सीमाओं के अनुसार कराए जा सकते हैं
क्या है परिसीमन?
परिसीमन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत राज्यों में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और उनकी सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाता है। इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होता है।
भारत में अब तक 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 82 और 170: निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का प्रावधान
- अनुच्छेद 330 और 332: SC/ST आरक्षित सीटों के निर्धारण से संबंधित प्रावधान
प्रशासन सक्रिय, सरकार चुप
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज बताई जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।



