नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा से पहले अब विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इस पहल की अगुवाई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) कर रही है और पार्टी विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर एकजुट करने में जुटी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा होनी है। इसके तुरंत बाद टीएमसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने की रणनीति बना रही है। अगर विपक्ष इसमें सफल रहता है, तो यह संसद के इतिहास में पहली बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लाया जाएगा।
कांग्रेस की सैद्धांतिक सहमति का दावा
टीएमसी के एक वरिष्ठ सांसद ने संसद परिसर में बताया कि इस प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस ने सैद्धांतिक रूप से समर्थन देने की सहमति जताई है। शुरुआती दौर की बातचीत के बाद अन्य विपक्षी दलों से भी चर्चा जारी है। विपक्ष को उम्मीद है कि प्रस्ताव लाने के लिए आवश्यक 100 सांसदों के हस्ताक्षर जुटा लिए जाएंगे।
मतदाता सूची विवाद बना मुद्दा
दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में करीब 60 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठी हुई हैं।
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया है। सोमवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचे ज्ञानेश कुमार का मंदिर और एयरपोर्ट पर विरोध भी किया गया।
चुनावी रणनीति के तौर पर मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी इस मुद्दे को आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक विषय बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर मतदाता सूची विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सकता है।



