छत्तीसगढ़ में बजट सत्र को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य का वार्षिक बजट 24 फरवरी को पेश किया जाएगा। इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने पूर्व मंत्री और कोन्टा विधायक कवासी लखमा को आगामी बजट सत्र में भाग लेने की सशर्त अनुमति दे दी है।
शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि लखमा को सदन की कार्यवाही में शामिल होने की इजाजत दी गई है, लेकिन इसके लिए कई कड़े नियम तय किए गए हैं। उन्हें सदन में प्रवेश से पहले अपना मोबाइल फोन जमा करना होगा। वे अपने खिलाफ दर्ज गिरफ्तारी और आबकारी घोटाले से जुड़े मामलों पर न तो सदन के भीतर चर्चा करेंगे और न ही मीडिया से इस विषय पर कोई बयान देंगे। आने-जाने की जानकारी विधानसभा सचिवालय को देनी होगी और वे अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा भी नहीं कर सकेंगे। सत्र के दौरान “नो स्पीच” की शर्त लागू रहेगी और उनकी उपस्थिति केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित रहेगी। यदि इन शर्तों का उल्लंघन होता है तो अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी।
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि वे बजट और अन्य सामान्य विषयों पर चर्चा में भाग ले सकते हैं, लेकिन अपने ऊपर लंबित मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण अन्य सदस्य भी इस विषय को नहीं उठाएंगे।
छत्तीसगढ़ की षष्ठम विधानसभा का अष्टम (बजट) सत्र 23 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा। सत्र की शुरुआत 23 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। इसके बाद 24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी वर्ष 2026-27 का आय-व्ययक प्रस्तुत करेंगे। 25 फरवरी को अभिभाषण पर चर्चा होगी, जबकि 26 और 27 फरवरी को बजट पर सामान्य चर्चा की जाएगी। 9 से 17 मार्च तक विभागवार अनुदान मांगों पर विचार होगा और 18 मार्च को विनियोग विधेयक पर चर्चा व पारित करने की प्रक्रिया तय की गई है।
इस सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 और छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी विचार किया जा सकता है। अब तक सदस्यों की ओर से कुल 2813 प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिनमें 1437 तारांकित और 1376 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अशासकीय संकल्प, शून्यकाल और याचिकाओं से जुड़ी सूचनाएं भी बड़ी संख्या में मिली हैं।
राजनीतिक दृष्टि से यह बजट सत्र बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि एक ओर सरकार वित्तीय दिशा तय करेगी तो दूसरी ओर विपक्ष भी विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।



