नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान एक ऐसा पल आया, जिसने गंभीर टेक चर्चा के बीच मुस्कान बिखेर दी। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन “दिल्ली का ट्रैफिक अभी उसके बस की बात नहीं है।”
यह टिप्पणी उन्होंने नई दिल्ली स्थित ब्रिटिश उच्चायोग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की, जहां वे ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी के साथ मंच साझा कर रहे थे।
देर से पहुंचे, तो ट्रैफिक पर कर दिया मजाक
कार्यक्रम में थोड़ी देरी से पहुंचे सुनक ने सबसे पहले माफी मांगी और फिर हल्के अंदाज़ में कहा —
“जैसा कि हमने इस हफ्ते देखा, एआई बहुत कुछ कर सकता है। लेकिन अभी यह दिल्ली के ट्रैफिक को ठीक नहीं कर सकता।”
हॉल में मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान फैल गई। लेकिन इसके बाद सुनक ने गंभीरता से भारत की टेक क्षमता और ऊर्जा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत में एआई को लेकर जो उत्साह है, वह दुनिया में दुर्लभ है।
“ब्रिटेन ही नहीं, भारत के भी बेटे” — और सुनक बोले “दामाद”
जब डेविड लैमी ने मंच से सुनक का परिचय देते हुए कहा कि वे केवल ब्रिटेन के ही नहीं, बल्कि भारत के भी बेटे हैं, तो सुनक ने तुरंत हंसते हुए कहा — “दामाद।”
इस पर पूरे हॉल में ठहाके गूंज उठे। लैमी ने भी मुस्कुराते हुए उनकी बात दोहराई। माहौल कुछ देर के लिए पूरी तरह दोस्ताना हो गया।
लैमी ने साझा की अपनी भारतीय जड़ें
डेविड लैमी ने बताया कि उनकी परदादी कोलकाता से थीं। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी और सुनक की राजनीतिक पार्टियां अलग हैं, लेकिन वे वर्षों से दोस्त हैं और कई अहम मुद्दों पर साथ काम कर चुके हैं।
उन्होंने विशेष रूप से प्रोस्टेट कैंसर के खिलाफ वैश्विक स्तर पर किए गए संयुक्त प्रयासों का जिक्र किया और कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद साझा लक्ष्यों पर काम किया जा सकता है।
एआई समिट और भारत-ब्रिटेन साझेदारी
चर्चा के दौरान एआई के वैश्विक महत्व पर बात करते हुए सुनक ने भारत को भविष्य की एआई क्रांति का प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, नवाचार तंत्र और तकनीक के प्रति लोगों का उत्साह इसे विशिष्ट बनाता है।
सुनक ने याद दिलाया कि उन्होंने ब्रिटेन में ब्लैचली पार्क में पहला वैश्विक एआई समिट आयोजित किया था। उनका मानना है कि एआई को लेकर एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय मंच की जरूरत है, जहां सुरक्षा और विकास दोनों पर समान रूप से चर्चा हो।
एआई सिर्फ विकसित देशों के लिए नहीं
सुनक ने जोर देकर कहा कि एआई का लाभ केवल विकसित देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विकासशील देशों के लिए भी यह तकनीक शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकती है।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन का एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट अग्रणी लैब्स के साथ मिलकर एआई मॉडलों की सुरक्षा जांच कर रहा है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
उनका कहना था — “एआई की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि आम लोग अपनी जिंदगी में इसके ठोस फायदे महसूस करें।”
भारत-ब्रिटेन संबंधों को नई दिशा
यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब भारत और ब्रिटेन व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की कोशिश कर रहे हैं। एआई इस साझेदारी का प्रमुख आधार बनता दिखाई दे रहा है।







