नई दिल्ली:मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेले गए ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच बॉक्सिंग-डे टेस्ट महज दो दिन में समाप्त हो गया, लेकिन जिस तरह की आलोचनाएं आमतौर पर भारत या उपमहाद्वीप की पिचों को लेकर होती हैं, वैसा कोई शोर ऑस्ट्रेलिया में सुनाई नहीं दिया। यही कारण है कि अब क्रिकेट जगत में ऑस्ट्रेलिया के दोहरे मापदंड पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एमसीजी की पिच पर पहले ही दिन 20 विकेट गिर गए थे और दोनों टीमें 200 रन का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं। मैच का नतीजा दूसरे दिन ही तय हो गया, जिसमें इंग्लैंड ने चार विकेट से जीत दर्ज की। इसके बावजूद न तो ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई और न ही पूर्व खिलाड़ियों ने पिच की आलोचना की।
दिलचस्प बात यह है कि जब भारत में स्पिन मददगार पिचों पर टेस्ट मैच ढाई या तीन दिन में खत्म होते हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और पूर्व दिग्गज सबसे ज्यादा मुखर नजर आते हैं। 2023 की भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज के दौरान माइकल क्लार्क सहित कई पूर्व खिलाड़ियों ने भारतीय पिचों को टेस्ट क्रिकेट के खिलाफ तक बता दिया था। उस वक्त भारतीय पिचों पर सवाल उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी।
अब वही स्थिति ऑस्ट्रेलिया की घरेलू पिच पर देखने को मिली है, लेकिन आलोचना पूरी तरह गायब है। यही वजह है कि क्रिकेट विशेषज्ञ इसे साफ तौर पर दोहरा रवैया मान रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या टेस्ट क्रिकेट के नियम और मानक सिर्फ उपमहाद्वीप के लिए ही बनाए गए हैं।
हालांकि इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने इस पिच पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि अगर दो दिन से भी कम समय में 36 विकेट गिर जाएं और कोई भी टीम सम्मानजनक स्कोर न बना सके, तो यह टेस्ट क्रिकेट के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता। स्टोक्स ने यह भी साफ किया कि वह इस मुद्दे को मैच रेफरी जेफ्री क्रो के सामने रखेंगे।
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन ने भी पिच की कड़ी आलोचना करते हुए इसे टेस्ट क्रिकेट का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा मैच भारत में होता, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो जाता। भारत के पूर्व बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने भी तंज कसते हुए कहा कि डेढ़-दो दिन में खत्म हुए इस टेस्ट में स्पिन गेंदबाजों को एक भी ओवर फेंकने का मौका नहीं मिला।
हकीकत यह है कि भारत में मैच जल्दी खत्म होने पर पिच को दोषी ठहराया जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में वही नतीजा आने पर इसे परिस्थितियों का नाम दे दिया जाता है। एमसीजी की इस पिच ने एक बार फिर क्रिकेट जगत के सामने ऑस्ट्रेलिया के दोहरे मापदंड को बेनकाब कर दिया है।







