राजनांदगांव/मोहला।मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम सीतागांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि वन अमले और सुरक्षाबलों पर पथराव और लाठी-डंडों से हमला किया गया। इस घटना में कई सुरक्षाकर्मियों के चोटिल होने की सूचना है।
ग्रामीणों के विरोध में महिलाएं सबसे आगे रहीं। बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में पत्थर और डंडे लेकर सुरक्षा बलों के सामने खड़ी हो गईं, जिससे स्थिति को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। हालात संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
नोटिस के बाद शुरु हुई कार्रवाई
रविवार सुबह राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम पूर्व में जारी नोटिस के आधार पर सीतागांव पहुंची थी। वन विभाग द्वारा गांव में वन भूमि पर बने 13 मकानों को हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका था। जैसे ही जेसीबी मशीन से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और देखते ही देखते पूरा गांव मौके पर जमा हो गया।
हालात बिगड़े, एक घंटे तक तनाव
प्रशासनिक टीम के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज होता गया। सुरक्षाबलों के पहुंचने के बाद भी स्थिति शांत नहीं हुई, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में ग्रामीण और आक्रामक हो गए। लगभग एक घंटे तक क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
2018 से वन भूमि पर कब्जा
जानकारी के मुताबिक, सीतागांव में वन भूमि पर अतिक्रमण का सर्वे वर्ष 2018 में किया गया था। इसके बावजूद कार्रवाई लंबे समय तक लंबित रही। विभाग की ओर से अतिक्रमणकारियों को तीन बार नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे। कार्रवाई के दौरान जब दो मकानों को तोड़ा गया, तभी विरोध उग्र हो गया।
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास कोई अन्य जमीन नहीं है, इसलिए उन्हें वन भूमि पर ही बसने दिया जाए।
थाने में बातचीत के बाद बनी सहमति
स्थिति बिगड़ने पर वन मंडलाधिकारी दिनेश पटेल मौके पर पहुंचे। इसके बाद ग्रामीण थाने के पास एकत्र हो गए, जहां राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की। बातचीत के बाद यह सहमति बनी कि मुख्य पक्के मकानों को फिलहाल नहीं तोड़ा जाएगा, जबकि अतिरिक्त और अस्थायी कब्जे हटाए जाएंगे।
सहमति के बाद दोबारा चली जेसीबी
सहमति बनने के बाद पुलिस बल की मौजूदगी में वन अमला दोबारा कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा। इस दौरान किसी बड़े विरोध की स्थिति नहीं बनी। जेसीबी की मदद से बाड़ी, निर्माणाधीन मकान और अस्थायी ढांचे हटाए गए। कुछ स्थानों पर निर्माण सामग्री हटाने के लिए 15 दिन की मोहलत भी दी गई है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगे की कार्रवाई शांति और कानून के दायरे में की जाएगी।
“ग्रामीणों से चर्चा के बाद यह तय हुआ है कि फिलहाल पक्के मकानों को नहीं हटाया जाएगा। अस्थायी और अतिरिक्त कब्जों पर कार्रवाई की जा रही है।”
— दिनेश पटेल, वन मंडलाधिकारी



