उज्जैन के द्वारकाधीश गोकुल मंदिर में शीतकालीन व्यवस्था लागू: भगवान को ऊनी वस्र पहनाए, आरती-भोग का समय बदला

Madhya Bharat Desk
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मध्यप्रदेश अगहन मास की उत्पत्ति एकादशी के साथ उज्जैन में शीत ऋतु का आगमन घोषित होते ही श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में भगवान की पूरे दिन की दिनचर्या में बदलाव कर दिया गया है। ठंड बढ़ने के साथ मंदिर प्रशासन और पुजारियों ने भगवान श्री गोपालजी को ऊनी वस्र धारण करवाए हैं, वहीं आरती और भोग के समय में भी शीतकालीन परिवर्तन लागू किए गए हैं।

उज्जैन के प्रमुख मंदिरों में यह वर्षों पुरानी परंपरा रही है कि सर्दी शुरू होते ही भगवान की मूर्तियों को ठंड से बचाने के लिए उनके वस्त्र बदले जाते हैं। इसी क्रम में गोपाल मंदिर में भी भगवान को ऊनी वस्त्र पहनाए गए। मंदिर में गर्माहट के लिए सिगड़ी या अंगीठी का प्रयोग किया जा रहा है, और भगवान को गर्म तासीर वाले व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा, ताकि मौसम के अनुसार उन्हें उचित उष्मा प्रदान की जा सके।

प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर में शनिवार को उत्पत्ति एकादशी के अवसर पर यह शीतकालीन परिवर्तन औपचारिक रूप से शुरू किया गया। मंदिर के पुजारी पावन शर्मा ने बताया कि भगवान के राजभोग में अब गुड़ और शुद्ध घी का उपयोग होगा। इसके साथ ही संध्या आरती में भगवान को केसर मिले दूध का भोग लगाया जाएगा, जो स्वस्थ्य और गर्माहट दोनों प्रदान करता है।

शीतकाल के कारण आरती-पूजन के समय में भी बदलाव किया गया है। पुजारियों के अनुसार सर्दियों में अधिकांश आरतियों का समय आधा घंटा आगे बढ़ा दिया गया है, जिससे भक्तों को सुविधा रहे और भगवान की सेवा भी सुव्यवस्थित रहे।

नया शीतकालीन आरती-दर्शन समय

प्रथम दर्शन: सुबह 5:00 बजे

कांकड़ आरती: सुबह 5:30 बजे

मंगला आरती: सुबह 6:00 बजे

राजभोग आरती: सुबह 10:30 बजे

मध्याह्न शयन: दोपहर 12:00 बजे

संध्या आरती: शाम 6:30 बजे

रात्रि शयन आरती: रात 8:15 बजे से 8:30 बजे तक

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