बिलासपुर के सिंचाई विभाग में 53 लाख रुपये के एपीएस घोटाले का मामला जोर पकड़ रहा है। विभागीय नियमों को दरकिनार करके अधिकारियों ने ठेकेदार को उस अतिरिक्त सुरक्षा निधि (APS Fund) का भुगतान कर दिया, जिसे किसी भी ठेकेदार को तभी लौटाया जा सकता है, जब वह अपना निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा कर ले। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ठेकेदार ने काम पूरा ही नहीं किया था, फिर भी जून 2024 में उसे 53 लाख रुपये की APS राशि का भुगतान कर दिया गया।
मामला कोटा डिवीजन के दबेना एनीकट निर्माण से जुड़ा है, जिसकी कुल लागत 5.20 करोड़ रुपये है। बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद विभाग के अधिकारी अब दावा कर रहे हैं कि फाइनल बिल रोका जाएगा, क्योंकि उन्हें बाद में पता चला कि APS राशि गलत तरीके से जारी कर दी गई थी। यह दावा तब किया जा रहा है जब ठेकेदार अब कह रहा है कि उसने एनीकट का काम पूर्ण कर लिया है।
APS फंड वह राशि है जिसे विभाग ठेकेदार से सुरक्षा के तौर पर जमा करवाता है और यह राशि तभी लौटाई जाती है जब विभाग काम से पूर्ण संतुष्ट हो। लेकिन यहाँ नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए ठेकेदार को काम पूरा होने से पहले ही राशि दे दी गई। इससे अधिकारियों की मिलीभगत और व्यक्तिगत लाभ के लिए नियमों से खिलवाड़ के आरोप भी सामने आए हैं।
जशपुर जिले में भी कुछ वर्ष पहले इसी तरह की गड़बड़ी में 2.93 करोड़ रुपये का APS भुगतान काम अधूरा रहने पर कर दिया गया था, जिस पर FIR भी दर्ज हुई थी। बावजूद इसके विभाग में नियम तोड़ने की परंपरा अब भी जारी दिखाई देती है।
विभाग के कार्यपालन अभियंता डी जायसवाल का कहना है कि गलत भुगतान को नियमानुसार वापस कराना होगा, उसके बाद ही ठेकेदार के फाइनल बिल पर कार्रवाई होगी। जब तक APS की राशि विभाग में वापस जमा नहीं होती, तब तक ठेकेदार को अंतिम भुगतान नहीं किया जाएगा।



