पटना। बिहार कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर मचे घमासान ने संगठन की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। टिकट वितरण में पक्षपात और विचारधारा की अनदेखी के आरोपों ने पार्टी की “सामाजिक न्याय” की नीति पर सवाल खड़ा कर दिया है।
हाल ही में बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की मौजूदगी में एक वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता ने टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर खुलकर विरोध जताया। इस विरोध ने पार्टी के भीतर के असंतोष और गुटबाजी को फिर से सामने ला दिया है।
प्रभारी के सामने फूटा गुस्सा
बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू जब संगठन की समीक्षा बैठक में पहुंचे, तब एक कार्यकर्ता ने मंच से ही पार्टी की नीति पर सवाल दागते हुए कहा:
“राहुल गांधी जी हमेशा दलित, पिछड़े और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, लेकिन टिकट तो उन लोगों को मिल गया जो हमारी विचारधारा से मेल नहीं खाते। यह अन्याय है और हम इसका विरोध जारी रखेंगे, चाहे पार्टी से निकाल ही क्यों न दिए जाएं।”
इस बयान ने न केवल टिकट वितरण में मनमानी के आरोपों को बल दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि शीर्ष नेतृत्व की विचारधारा और जमीनी स्तर की हकीकत में गहरा अंतर है।
आरोप: विचारधारा की अनदेखी और गुटबाजी का असर
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टिकट बांटते समय पार्टी ने समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया और बाहरी या ‘विपरीत विचारधारा’ से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी। इससे कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंतरिक असंतोष आने वाले चुनाव में पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
नेतृत्व के लिए चुनौती
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बिहार कांग्रेस के लिए यह आंतरिक विवाद एक बड़ी चुनौती बन गया है। प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के सामने अब संगठन में एकजुटता बनाए रखने और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने की कठिन जिम्मेदारी है।
अगर कांग्रेस नेतृत्व इस असंतोष को नहीं सुलझा पाया, तो इसका सीधा असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।







