बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस में बगावत तेज, टिकट बंटवारे पर नेताओं का हंगामा — प्रभारी पर गंभीर आरोप

Madhya Bharat Desk
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कांग्रेस पार्टी में बगावत खुलकर सामने आ गई है। टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी में जबरदस्त घमासान मच गया है। नाराज नेताओं ने प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और धरने-प्रदर्शन का एलान किया है।

पटना के सदाकत आश्रम स्थित कांग्रेस मुख्यालय में गुरुवार को नेताओं ने धरने की घोषणा की। बुधवार को हुई पार्टी बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया। बैठक में शामिल वरिष्ठ नेता आनंद माधव ने कहा कि “वर्तमान नेतृत्व पार्टी को कमजोर कर रहा है।” उन्होंने प्रदेश प्रभारी पर पैसे लेकर टिकट बांटने के आरोप लगाए।

जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन एकजुटता का दावा कर रहा है, कांग्रेस की यह अंदरूनी कलह पार्टी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। पहले सीट बंटवारे में देरी और अब टिकट विवाद ने एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी में पुराने बनाम नए चेहरों का टकराव स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

कृष्णा अल्लावरु, राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं और बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव भी उनसे नाराज हैं। इस बीच कांग्रेस हाईकमान ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अशोक गहलोत को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा है ताकि राजद-कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरी को कम किया जा सके।

अशोक गहलोत की सक्रियता: लालू और तेजस्वी से मुलाकात

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत बुधवार को पटना पहुंचे और राबड़ी देवी के आवास पर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस बैठक के बाद गहलोत ने मीडिया से कहा,

“महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है। बिहार की 243 सीटों में कुछ पर स्थानीय कारणों से दोस्ताना मुकाबला हो सकता है।”

पूर्व विधायक की नाराज़गी

शेखपुरा के बरबीघा से पूर्व विधायक गजानंद शाही ने भी प्रदेश प्रभारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 2020 में वे मात्र 113 वोटों से हारे थे, फिर भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने योग्य कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की है।
शाही और आनंद माधव समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है और अल्लावरु को हटाने की अपील की है।

इन नेताओं ने हाल ही में प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष राजेश राम पर भी केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह करने का आरोप लगाया था। कई नेताओं ने मल्लिकार्जुन खरगे को अपने इस्तीफे भी भेजे हैं।

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