दंतेवाड़ा: तेलंगाना में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ बड़ी सफलता हाथ लगी है। यहां 60 लाख रुपये के इनामी तीन कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन माओवादियों में पति-पत्नी की जोड़ी भी शामिल है। ये तीनों करीब 30 सालों से भूमिगत (अंडरग्राउंड) थे और बस्तर क्षेत्र के सक्रिय संगठन से जुड़े हुए थे।
आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान कुनकती वेंकटैया उर्फ रमेश, मोगिलिचेरला वेंकटराजू उर्फ एर्रा राजू और थोडेम गंगा उर्फ गंगाव्वा के रूप में हुई है। तीनों पर 20-20 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
इन सभी ने तेलंगाना पुलिस के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी के सामने सरेंडर किया।
डीजीपी रेड्डी ने बताया कि अब तेलंगाना में माओवादी संगठन के दोबारा सक्रिय होने की संभावना न के बराबर है। उन्होंने कहा कि,
“पिछले कुछ महीनों में 400 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनमें 90 प्रतिशत छत्तीसगढ़ से जुड़े हुए हैं।”
केंद्र सरकार के अभियान का असर:
माओवाद को जड़ से खत्म करने के लिए केंद्र सरकार लगातार अभियान तेज कर रही है। हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कई बड़े इनामी नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं।
अमित शाह ने दी थी सख्त चेतावनी:
हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर दौरे के दौरान कहा था कि मार्च 2026 तक देश से माओवाद का खात्मा कर दिया जाएगा।
उन्होंने बस्तर में चल रही ‘नियद नल्लानार योजना’ और पुनर्वास नीतियों की सराहना करते हुए कहा था कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
माड़डिविजन ने छोड़ा सशस्त्र संघर्ष:
कुछ दिन पहले ही माड़ डिविजनल कमेटी ने भी सशस्त्र संघर्ष छोड़ने का ऐलान किया था। सचिव सणीता ने बयान जारी कर बताया कि यह निर्णय पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू के नेतृत्व में लिया गया है।
माड़ डिविजन ने उत्तर बस्तर और गढ़चिरौली डिविजन की तरह अब शांति प्रक्रिया का समर्थन किया है।







