छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले की जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की जांच एजेंसियों—प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW)—को सख्त अल्टीमेटम जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि ये एजेंसियाँ दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक अपनी जांच पूरी करें और फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
पृष्ठभूमि और निर्देश
यह आदेश उन 13 याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिन्हें इस मामले से संबद्ध पक्षों ने दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि जांच को लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले की जांच लगभग दो वर्ष से अधिक समय से चल रही है, लेकिन अब इसे जल्द समाप्त करना अनिवार्य है।
पूछताछ और अगली कार्रवाई
— ED और EOW ने प्रतिक्रिया स्वरूप 30 आबकारी अधिकारियों से बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है, जिनमें से कुछ पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं।
— आरोपितों और संदिग्धों से पूछताछ जारी है ताकि सभी वित्तीय लेनदेन, कमीशन, और गड़बड़ियों के तार जुड़े जा सकें।
— फाइनल रिपोर्ट के साथ पूरक आरोपपत्र (supplementary charge-sheet) दायर करने की संभावना को भी कोर्ट ने ध्यान में रखा है।
गिरफ्तारियां और याचिकाएँ
— इस मामले में कुछ प्रमुख गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत याचिका विशेष अदालत ने खारिज कर दी है।
— EOW ने चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, और उन्हें पाँच दिन की रिमांड पर भेजा गया था ताकि गहन पूछताछ हो सके।
महत्व और चुनौतियाँ
यह मामला सिर्फ एक वित्तीय घोटाला नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गहरे असर वाला मामला है। इसमें भ्रष्टाचार, नौकरशाही गठजोड़, और राजस्व की अनाधिकृत हानि जैसे गंभीर आरोप हैं।
फिर भी, जांच एजेंसियों के सामने चुनौतियाँ कम नहीं हैं — समय सीमा, पर्याप्त साक्ष्य जुटाना, कानूनी याचिकाएँ, बाधाएँ, और राजनीतिक दबाव। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश यह दिखाता है कि न्यायालय इस विषय को गंभीरता से ले रहा है और सुनिश्चित करना चाहता है कि देर नहीं हो।



