छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को नई दिशा मिल रही है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने खुलासा किया है कि नक्सली अब जंगलों से निकलकर शहरों में अपने नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों से वे अपने संगठन के लिए नए बेस तैयार करने में जुटे थे, लेकिन राज्य की स्पेशल इंटेलिजेंस एजेंसी (SIA) लगातार इन पर निगरानी रख रही है।
SIA अब शहरी क्षेत्रों में फैले नक्सली नेटवर्क की पूरी प्रोफाइलिंग कर रही है ताकि इस नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके। गृह मंत्री ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी किरायेदार या संदिग्ध व्यक्ति के बारे में जानकारी हो तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।
नक्सलियों की आर्थिक स्थिति पर भी बड़ा खुलासा हुआ है। विजय शर्मा के अनुसार, नक्सलियों की कुल आय में 80% की गिरावट आई है। उनके पास से सोने की बिस्कुट और नकदी बरामद हुई है, लेकिन अब उनके संसाधन काफी कम हो गए हैं। सरकार की कड़ी निगरानी के कारण उनके फंडिंग नेटवर्क पर रोक लगाई जा रही है।
डिप्टी सीएम ने पहली बार टॉप नक्सली नेताओं के नाम भी उजागर किए हैं। सोनू, वेणुगोपाल, सतीश, भरसादेव और हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली अगर मुख्यधारा में लौटते हैं, तो उनका स्वागत रेड कार्पेट के साथ किया जाएगा और विचारधारा पर संवाद के अवसर दिए जाएंगे। सरकार अब नक्सलवाद के खिलाफ केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विचारधारा के स्तर पर भी लड़ाई लड़ रही है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि युवाओं को नक्सलवाद के नाम पर बरगलाया गया था, लेकिन अब यह भ्रम धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। विचारधारा की इस जंग में सरकार युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नक्सलवाद के खिलाफ वैचारिक लड़ाई शुरू हो चुकी है और समाज को हिंसा से बाहर निकालने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।



