कस्टम मिलिंग और कोल लेवी घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: कई शहरों में छापेमारी, अफसरों और कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ीं

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए शुक्रवार सुबह रायपुर, बिलासपुर और धमतरी सहित कई शहरों में कारोबारी ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कस्टम मिलिंग घोटाले और कोल लेवी स्कैम से जुड़ी मानी जा रही है।

ईडी की टीम ने रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े कारोबारी रेहेजा ग्रुप, बिलासपुर स्थित सुल्तानिया ग्रुप और मीनााक्षी सेल्स के दफ्तरों और घरों पर छापेमारी की। जांच में ईडी को पता चला कि घोटाले से अर्जित धनराशि का उपयोग रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज की खरीद-बिक्री में किया गया है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि कस्टम मिलिंग घोटाले में अनियमितताओं से भारी मात्रा में धन की हेराफेरी की गई। इस पैसे को प्रॉपर्टी निवेश में लगाया गया ताकि ब्लैक मनी को वैध रूप में दिखाया जा सके। टीम ने दस्तावेज, फाइलें और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं।

इसी तरह, कोल लेवी घोटाले में भी ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 से अधिक वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा है। जांच में खुलासा हुआ कि अवैध वसूली के माध्यम से करीब 570 करोड़ रुपये की कथित लेवी वसूली गई थी।

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, इस घोटाले का मास्टरमाइंड कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को बताया गया है, जिसके कर्मचारियों के माध्यम से अवैध धनराशि एकत्र की जाती थी। इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी समीर बिश्नोई, रायगढ़ की कलेक्टर रानू साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव सोनिया चौरसिया सहित कई लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि कस्टम मिलिंग और कोल लेवी जैसे घोटालों ने राज्य की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। अवैध रूप से अर्जित धन का उपयोग अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री और मनी लॉन्ड्रिंग के रूप में किया गया।

ईडी की इस छापेमारी ने एक बार फिर इन मामलों को सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि आगे की जांच में किन नए चेहरों और अधिकारियों के नाम सामने आते हैं।

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