अयोध्या का मुद्दा लंबे समय से धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र रहा है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार का विवादित बयान सामने आया है, जिसने इस बहस को और तेज कर दिया। कटियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अयोध्या में किसी भी कीमत पर मस्जिद का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना था कि अयोध्या मंदिरों की नगरी है और यहां रहने वाले मुस्लिम समुदाय को अब शहर छोड़ देना चाहिए।
कटियार ने यह टिप्पणी उस समय की, जब धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद निर्माण की योजना स्थानीय प्रशासन द्वारा एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के अभाव में खारिज कर दी गई। उन्होंने इसे लेकर और भी सख्त रुख अपनाया और कहा कि बाबरी मस्जिद के बदले किसी भी तरह की दूसरी मस्जिद को अयोध्या में बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उनका यह भी कहना था कि अयोध्या में मुस्लिम समुदाय का कोई अधिकार नहीं है और समय आने पर उन्हें किसी भी कीमत पर शहर से बाहर कर दिया जाएगा। कटियार ने यहां तक कह दिया कि इसके बाद अयोध्या में पूरे उत्साह के साथ दिवाली मनाई जाएगी और मुसलमानों को सरयू नदी के पार जाना होगा।
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक रहे विनय कटियार का यह बयान अयोध्या विवाद के ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व को दोबारा उजागर करता है। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भी वे एक अभियुक्त रहे, लेकिन 2020 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। भाजपा की छात्र शाखा एबीवीपी से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले कटियार लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन के मुखर चेहरों में गिने जाते रहे हैं।
अयोध्या विवाद पर दिया गया उनका यह बयान न केवल राजनीतिक हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों में बहस को भी जन्म दे रहा है। यह मुद्दा फिर एक बार दिखा रहा है कि अयोध्या का प्रश्न भारत की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में कितना गहरा और संवेदनशील है।



