रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सर्किट हाउस, जो कभी आम नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के लिए सरकारी ठहराव का प्रमुख केंद्र माना जाता था, अब कथित तौर पर मुख्यमंत्री के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) और निजी सचिव (पीए) के कब्जे में आ गया है।
सूत्रों के अनुसार, सर्किट हाउस के अधिकांश कमरे मुख्यमंत्री के ओएसडी और पीए के नाम पर स्थायी रूप से बुक रहते हैं, जिससे आम जनता के लिए कमरे मिलना लगभग असंभव हो गया है।
इस खुलासे के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को इस स्थिति की जानकारी है, या फिर ओएसडी और पीए का दबदबा इतना मजबूत है कि मुख्यमंत्री भी हस्तक्षेप नहीं कर पा रहे?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जनता के लिए बने सरकारी संसाधनों का इस तरह से दुरुपयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सर्किट हाउस अब आम जरूरतमंदों के बजाय सत्ता से जुड़े “खास मेहमानों” का अड्डा बनता जा रहा है।
यदि मुख्यमंत्री ने इस मामले में जल्द कदम नहीं उठाया, तो यह साफ संदेश जाएगा कि असली सत्ता मुख्यमंत्री के बजाय उनके ओएसडी और पीए चला रहे हैं, और आम जनता की आवाज यहां दबाई जा रही है।



