रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले (CG Coal Scam) में निलंबित IAS अधिकारी रानू साहू की परेशानियां और बढ़ गई हैं। अंतरिम जमानत पर बाहर चल रहीं रानू साहू की संपत्तियों की अब लोक निर्माण विभाग (PWD) जांच करेगा।
ईओडब्ल्यू (EOW) और एसीबी (ACB) ने पीडब्ल्यूडी से गरियाबंद जिले के तुलसी गांव में स्थित उनके मकान, फार्म हाउस और दुकानों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। रायपुर संभाग क्रमांक-2 की टीम को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संपत्तियों के खर्च और इंटीरियर की होगी जांच
पीडब्ल्यूडी की टीम इन इमारतों के निर्माण की समयावधि, खर्च और सामग्री की मौजूदा कीमत का आकलन करेगी। रिपोर्ट में मकान और फार्म हाउस के महंगे झूमर, फॉल सीलिंग, मॉड्यूलर किचन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इंटीरियर डेकोरेशन, फर्नीचर और सबमर्सिबल पंप तक का मूल्यांकन शामिल होगा।
कृषि भूमि पर बिना अनुमति हुआ निर्माण
चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी निर्माण कृषि भूमि पर किए गए हैं और इनके लिए पंचायत से कोई अनुमति (NOC) नहीं ली गई थी। ग्रामीण प्रतिनिधियों के अनुसार यह निर्माण नियमों का उल्लंघन है। पहले राजस्व विभाग ने इस भूमि को सील भी किया था। वर्तमान में यहां ‘धूम कैलिफोर्निया’ रेस्टोरेंट संचालित हो रहा है। तुलसी गांव की करीब 0.622 हेक्टेयर भूमि अरुण कुमार साहू और लक्ष्मी साहू के नाम पर दर्ज है।
कोयला घोटाले में गिरफ्तारी और जमानत
गौरतलब है कि 22 जुलाई 2023 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रानू साहू को कोल और डीएमएफ घोटाले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद 3 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट के निर्देश अनुसार, रानू साहू छत्तीसगढ़ में केवल जांच या सुनवाई के लिए ही आ सकती हैं।
अब EOW और ACB उनकी संपत्तियों की वास्तविक लागत और आय के बीच के अंतर की गहन जांच में जुटी है।







