छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर से विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विपक्ष ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मामले को असंवैधानिक ठहराते हुए राज्यपाल रमण डेका को पत्र लिखा है।
अपने पत्र में डॉ. महंत ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1क) के अनुसार, किसी भी राज्य की मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इस हिसाब से छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या 13.50 से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन हाल ही में हुए विस्तार के बाद यह संख्या 14 तक पहुँच गई है, जो संवैधानिक सीमा का उल्लंघन है।
महंत का आरोप है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रिमंडल का विस्तार कर संविधान की मर्यादा को ठेस पहुँचाई है। उन्होंने मांग की है कि एक मंत्री को हटाया जाए, ताकि मंत्रिपरिषद की संख्या संविधान के अनुरूप रहे।
यह विवाद न केवल सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के पालन पर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करता है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



