चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे पर तीखा हमला बोला है। किशोर ने कहा कि जन सुराज की बढ़ती ताकत का ही नतीजा है कि प्रधानमंत्री मोदी भी बिहार आकर पलायन जैसे मुद्दों पर बात करने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर बिहार में ‘घुसपैठिए’ हैं तो इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह दोषी हैं, क्योंकि पिछले 15 सालों से उनकी सरकार केंद्र में है।
मोदी सरकार पर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मौजूदा केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर बिहार में पलायन एक बड़ी समस्या है, तो यह मौजूदा नेतृत्व की अक्षमता को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह जन सुराज अभियान की बढ़ती लोकप्रियता और जनता के बीच इसकी पहुंच का प्रमाण है कि राष्ट्रीय स्तर के नेता भी बिहार के जमीनी मुद्दों को उठाने के लिए बाध्य हो रहे हैं।
जन सुराज के चार प्रमुख वादे
इसी दौरान, प्रशांत किशोर ने यह भी बताया कि अगर जन सुराज बिहार में सरकार बनाती है, तो वे सबसे पहले चार महत्वपूर्ण काम करेंगे:
- शराबबंदी कानून की समाप्ति: प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि सरकार बनने के एक घंटे के भीतर बिहार में मौजूदा शराबबंदी कानून को खत्म कर दिया जाएगा। उनका मानना है कि यह कानून असफल रहा है और इससे भ्रष्टाचार बढ़ा है।
- बुजुर्गों के लिए मासिक पेंशन: जन सुराज की सरकार बुजुर्गों को 2 हजार रुपए मासिक पेंशन प्रदान करेगी, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
- पलायन रोको विभाग: युवाओं को बिहार में ही रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से एक विशेष ‘पलायन रोको विभाग’ बनाया जाएगा। इसका लक्ष्य स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित कर पलायन को रोकना है।
- गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा: गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
प्रशांत किशोर के इन बयानों और वादों ने बिहार की राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए।







