नई दिल्ली।कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई पीपीटी प्रेजेंटेशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जिस संस्था के डेटा पर यह प्रस्तुति आधारित थी, उसने अब मान लिया है कि उसमें गलती हुई थी।
विवाद की शुरुआत
राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में जिस डेटा को आधार बनाकर बड़ा खुलासा करने की कोशिश की थी, वह गलत साबित हुआ। संस्था की ओर से माफी भी मांगी गई है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह गलती सामान्य थी या जानबूझकर सनसनी फैलाने के लिए की गई थी?
संजय कुमार और राहुल गांधी पर केस की मांग
राजनीतिक हलकों में अब यह मांग उठ रही है कि राहुल गांधी और संजय कुमार दोनों पर केस दर्ज होना चाहिए। आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा ‘एटम बम’ फोड़ा जिससे चुनाव आयोग (@ECISVEEP) की साख पर सवाल खड़े हुए और जनता के बीच अविश्वास का माहौल बनाया गया।
सवालों के घेरे में मंशा
विशेषज्ञों का कहना है कि माफी मांगने से मामला खत्म नहीं होता। असल मुद्दा यह है कि क्या यह गलती सोच-समझकर की गई थी, ताकि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर चोट पहुंचाई जा सके? इस विवाद ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में इसकी कानूनी लड़ाई और तेज हो सकती है।



